
इतने गहरे उतर गया हूँ दरिया-ए-दर्द-ए-दिल में
हाथ पकड़ कर खींच ले वरना डूब के भी मर सकता हूँ
कट्टे ख़ंजर रस्सी माचिस कुछ दिन मुझ से दूर रखो
कुछ करने से चूक गया हूँ मैं कुछ भी कर सकता हूँ
— Vashu Pandey
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