Anjum Saleemi

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@anjum-saleemi

Anjum Salimi shayari collection includes sher, ghazal and nazm available in Hindi and English. Dive in Anjum Salimi's shayari and don't forget to save your favorite ones.

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Sher

सब के शानों पे एक चेहरा था जिन पे सूरत बनी हुई थी मेरी — Anjum Saleemi
किस शफ़क़त में गुँधे हुए मौला माँ बाप दिए कैसी प्यारी रूहों को मेरी औलाद किया — Anjum Saleemi
माँ की दुआ न बाप की शफ़क़त का साया है आज अपने साथ अपना जनम दिन मनाया है — Anjum Saleemi
एक दिन मेरी ख़ामुशी ने मुझे लफ़्ज़ की ओट से इशारा किया — Anjum Saleemi
उठाए फिरता रहा मैं बहुत मोहब्बत को फिर एक दिन यूँँही सोचा ये क्या मुसीबत है — Anjum Saleemi
मैं चीख़ता रहा कुछ और भी है मेरा इलाज मगर ये लोग तुम्हारा ही नाम लेते रहे — Anjum Saleemi
मुझे पता है कि बर्बाद हो चुका हूँ मैं तू मेरा सोग मना मुझ को सोगवार न कर — Anjum Saleemi

Ghazal

इक दूजे को देर से समझा देर से यारी की हम दोनों ने एक मोहब्बत बारी बारी की ख़ुद पर हँसने वालों में हम ख़ुद भी शामिल थे हम ने भी जी भर कर अपनी दिल-आज़ारी की इक आँसू ने धो डाली है दिल की सारी मैल एक दिए ने काट के रख दी गहरी तारीकी दिल ने ख़ुद इसरार क्या इक मुमकिना हिजरत पर हम ने इस मजबूरी में भी ख़ुद-मुख़तारी की चौदा बरस के हिज्र को इम-शब रुख़्सत करना है सारा दिन सो सो कर जागने की तय्यारी की हम भी इसी दुनिया के बासी थे सो हम ने भी दुनिया वालों से थोड़ी सी दुनिया-दारी की 'अंजुम' हम उश्शाक़ में ऊँचा दर्जा रखते हैं बे-शक इश्क़ ने ऐसी कोई सनद न जारी की — Anjum Saleemi
ये मोहब्बत का जो अम्बार पड़ा है मुझ में इस लिए है कि मेरा यार पड़ा है मुझ में छींट इक उड़ के मेरी आँख में आई तो खुला एक दरिया अभी तह-दार पड़ा है मुझ में मेरी पेशानी पे उस बल की जगह है ही नहीं सब्र के साथ जो हमवार पड़ा है मुझ में हर तअ'ल्लुक़ को मोहब्बत से निभा लेता है दिल है या कोई अदाकार पड़ा है मुझ में मेरा दामन भी कोई दस्त-ए-हवस खींचता है एक मेरा भी ख़रीदार पड़ा है मुझ में किस ने आबाद किया है मेरी वीरानी को इश्क़ ने? इश्क़ तो बीमार पड़ा है मुझ में मेरे उकसाने पे मैं ने मुझे बर्बाद किया मैं नहीं मेरा गुनहगार पड़ा है मुझ में मशवरा लेने की नौबत ही नहीं आ पाती एक से एक समझदार पड़ा है मुझ में ऐ बराबर से गुज़रते हुए दुख थम तो सही तुझ पे रोने को अज़ा-दार पड़ा है मुझ में मेरा होना मेरे होने की गवाही तो नहीं मेरे आगे मेरा इनकार पड़ा है मुझ में भूख ऐसी है कि मैं ख़ुद को भी खा सकता हूँ कैसा ये क़हत लगातार पड़ा है मुझ में — Anjum Saleemi