Abuzar kamaal

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Abuzar kamaal shayari collection includes sher, ghazal and nazm available in Hindi and English. Dive in Abuzar kamaal's shayari and don't forget to save your favorite ones.

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  • Sher
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Sher

दुनिया की ऐश गाह से अनजान कर गया हिन्दू नमाज़ी मुझ को मुसलमान कर गया — Abuzar kamaal
लगाता हूँ जब तो गैरों से दिल लगाता हूँ मैं नहीं लगाता तो अपनो को मुँह नहीं लगाता — Abuzar kamaal
साथ चलना पीछे से कीचड़ उड़ाना ये हुनर सीखा है क्या चप्पल से जानाँ — Abuzar kamaal
मुलाक़ात है तो मुलाक़ात है मोहब्बत न समझो मुलाक़ात को — Abuzar kamaal
जिस सेे ये तू ने लगाई फाँसी वो रस्सी किसी के झूले की थी — Abuzar kamaal
खिलौना चाहिए और कुछ लो दिल लो खेलती रहना — Abuzar kamaal
ज़िन्दगी है आप और आप का ही है ख़याल लज़्ज़त-ए-हयात कितने चटपटे है दुनिया में — Abuzar kamaal
ख़ुदा तेरा मोहताज हूँ अपना मोहताज रखना अता कर बुलंदी, खु़दाई की भी लाज रखना — Abuzar kamaal
प्यार गर लगे होने ख़ुद को रोक लेना तुम साफ़ कह रहा हूँ मैं फ़ाइदा उठा लूँगा — Abuzar kamaal
बस इतनी सी ख़्वाहिश है टेबल, कॉफ़ी, मैं और तुम — Abuzar kamaal
मोहब्बत नशा है, नशा है मोहब्बत जिसे पहले होश आया वो बे-वफ़ा है — Abuzar kamaal
आँखों में देखने की मुझे ये सज़ा मिली नफ़रत से देखता है मेरा आइना मुझे — Abuzar kamaal
क्या टूट गया है दिल जो शोर शराबा है? कुछ लोग मरे हैं गाड़ी ही तो पलट गइ है — Abuzar kamaal
जलाओ न आँखें मेरी खोज में जलन ये बुझा दो मैं दिख जाऊँगा — Abuzar kamaal

Ghazal

जिस को निहारते हैं सभी आसमाँ है ये जिस के लिए निहारते हैं सब, कहाँ है ये कोई गुज़र गया है यहाँ से अभी अभी हाथी या कोई शे'र था किस के निशाँ है ये बदला लिबास की जो तरह तुम ने जिस्मों को रक्खो हया की लाज जफ़ा-कारियाँ है ये लगता उजड़ गए हैं तुम्हारे वो ख़्वाब सब छोड़ो नहीं समेटो इन्हें किरचियाँ है ये तन्हाई दौड़ती है इसे काटने यहाँ हैरत है अपने घर में ही बे-आशियाँ है ये दुश्मन को जान मान लिया जाता है जहाँ हम इस की बुलबुलें हैं वो हिंदोस्ताँ है ये लगता नहीं कोई भी यहाँ अपना सा कमाल कैसा अजीब शहर है क्या ख़ाक-दाँ है ये — Abuzar kamaal
ग़ज़लें वज़लें कहता जाए उस को धुन में गाया जाए राजा ज़िंदा रहे आख़िर तक जान से चाहे घोड़ा जाए दूरी बनाना आसाँ होगा बीच में मज़हब लाया जाए दुनिया से मैं तब जाऊँगा पहले रोना धोना जाए मुझ को सुनने वालों बोलो उस को कितना सोचा जाए आज रहे घर वाला घर पे जॉब पे बाहर वाला जाए दूर निशाना है वो जितना तीर उतना ही गहरा जाए मुझ सेे पहले इंटरव्यूँँ को मेरे बराबर वाला जाए हाथ वो प्रॉपर्टी आएगी दुनिया से कब बूढ़ा जाए नज़रें मिलने से धोखे पर शर्म हया का पर्दा जाए सर्वे पे नीची बस्ती को इंसाँ कोई ऊँचा जाए दूर अगर जो अपना जाए आँखें जाए सपना जाए ग़ज़लें सुनने से क्या होगा शाइ'र को भी समझा जाए दिल रोएगा जाने वाले वक़्त बिछड़ते रोया जाए — Abuzar kamaal
राह में ऐसी कोई मुश्किल मिले जिस सेे आसानी से मेरा दिल मिले जज़्बा-ए-बे-ताबी-ए-मंज़िल मिले कोई तो दुनियाँ में मुझ सेा दिल मिले कोई तो मुझ को मेरे क़ाबिल मिले जितने भी हम को मिले बुज़दिल मिले ऐ ख़ुदाया इश्क़ में ना दिल मिले मुझ को मेरा इश्क़ ला-हासिल मिले क़त्ल-ओ-ग़ारत हर जगह बरपा हुआ ढूंढ़ लो गर जो तुम्हें क़ातिल मिले तारे क़िस्मत के मिले बुझते हुए बद-नसीबी के सभी झिल-मिल मिले गर समझना चाहता है तो समझ रह भटकने से ही तो मंज़िल मिले चाहता है हर कोई तन्हाँ सा दिल हर दुखा दिल चाहता ख़ुश-दिल मिले उस की थी सब सेे बड़ी ये बद-दुआ तुझ सेे पत्थर दिल को पत्थर दिल मिले है रज़ा दोनो तरफ़ से इश्क़ की लड़कों के फिर हाथ में क्यूँ बिल मिले जिस जगह तुम बोल सकते हो कमाल काश ऐसी भी कोई महफ़िल मिले — Abuzar kamaal