सुन रहा हूँ फिर से मैं तारीफ़ें अपनी लोगों से
    लगता है फिर से किसी को काम पड़ने वाला है

    मुझसे मिलना भी गवारा नइँ हो पाता था तेरा
    तू गले भी लग गई उसके वो इतना प्यारा है
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    Vikas Shah musafir
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    बस ना कर दो मुझे चुप होके चला जाऊँगा
    मैं मुसाफ़िर हूँ तलैयुल से चला जाऊँगा

    एक के होते हुए भी किसी और की चाहत
    ऐसी उल्फ़त से अलग हो के चला जाऊँगा
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    Vikas Shah musafir
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    उसे जाना था तो जाने दिया रोका नहीं मैंने
    ज़बरदस्ती का रिश्ता अब मुझे उससे नहीं रखना
    Vikas Shah musafir
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    मोहब्बत के सिवा ग़म और भी हैं इस ज़माने में
    ये सब कुछ छोड़ कर मसरूफ़ हूँ पैसा कमाने में

    हमें मालूम है सब कुछ यहाँ पैसा ही होता है
    बड़ा ख़र्चा है आता अब मु'आलिज को दिखाने में

    अमीरों से मुझे नफ़रत नहीं बस ये शिकायत है
    ये रोटी फेंक कर ख़ुश हैं ग़रीबों को सताने में

    मेरी आँखों के आँसू इस तरह सूखे हुए हैं अब
    बड़ा ग़ुस्सा है आता अब ज़बरदस्ती बहाने में

    मुझे अब याद आते हैं वो बचपन के पुराने दिन
    मुझे हर चीज़ मिल जाती थी बस रो कर दिखाने में
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    Vikas Shah musafir
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    इन सब तकलीफ़ों से थक कर आँखों से आँसू बहते हैं
    कहने वाले क्या जानें सहने वाले कितना सहते हैं
    Vikas Shah musafir
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    मैं तुमको सिर्फ़ रोने के लिए अब याद करता हूँ
    वो पहले का ज़माना और था हर दिन याद आते थे
    Vikas Shah musafir
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    मेरे वालिद पे क़र्ज़ा था मेरी तालीम को लेकर
    उसी लाला का अब मुझको तो कर्ज़ा भी चुकाना है
    Vikas Shah musafir
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    कल जो देखा तुझे दिल ये बोला मुझे
    गर जो चाहत है तो साथ रखना मुझे

    आज तुम मुझ से फिर एक वादा करो
    याद जब मेरी आये तो मिलना मुझे

    आज अफ़सोस है मुझ को उस बात का
    तुमने फिर पहले जैसा सताया मुझे

    तेरी आँखों के आँसू मिरे आँख से
    ऐसे जी भर के तूने रुलाया मुझे

    आज तुमने ग़लत कुछ ज़ियादा किया
    कर दिया बज़्म में जो इशारा मुझे

    मैने देखा नहीं देख कर भी तुझे
    रास्ते में जो कल मिल गया था मुझे
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    Vikas Shah musafir
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    मेरा प्यार समझ ले अब तो
    अब तो मुझको सोच ले जाना

    अब तन्हा हैं हम दोनों फिर
    साथ चलेंगे मिल के जाना
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    Vikas Shah musafir
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    मेरे सपनों की हो रानी
    मैंने तो बस इतना कहना
    Vikas Shah musafir
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