
सुन रहा हूँ फिर से मैं ता'रीफ़ें अपनी लोगों से
लगता है फिर से किसी को काम पड़ने वाला है
मुझ से मिलना भी गवारा नइँ हो पाता था तेरा
तू गले भी लग गई उस के वो इतना प्यारा है
— Vikas Shah musafir
Other sher from the same pen
Shers of visaal.
Voices in the same orbit
Poetry by feeling