Vikas Shah musafir

Vikas Shah musafir

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Vikas shah shayari collection includes sher, ghazal and nazm available in Hindi and English. Dive in Vikas shah's shayari and don't forget to save your favorite ones.

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  • Sher
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Sher

सुना है ये ग़रीबी हर सफ़र को रोक सकती है दिसम्बर जा रहा है रोक ले जो रोक सकती है — Vikas Shah musafir
कोई इक ही वो रिश्ता अब निभाता है जो रिश्ता दोनों ने मिल कर बनाया था — Vikas Shah musafir
एक ज़िद्दी लड़का हासिल आपगा को कर रहा और घूरता भी जा रहा है उस फ़लक को ग़ौर से अब — Vikas Shah musafir
जो अस्ली ग़ज़ल है यही है "ग़ज़ल" वो मगर ये "ग़ज़ल" जो है अस्ली नहीं है — Vikas Shah musafir
इश्क़ की इस क़ैदस मुझ को रिहाई कब मिलेगी देश तो आज़ाद कब का बंदिशों से हो चुका है — Vikas Shah musafir
इन सब तकलीफ़ों से थक कर आँखों से आँसू बहते हैं कहने वाले क्या जानें सहने वाले कितना सहते हैं — Vikas Shah musafir
मैं तुम को सिर्फ़ रोने के लिए अब याद करता हूँ वो पहले का ज़माना और था हर दिन याद आते थे — Vikas Shah musafir
मेरे वालिद पे क़र्ज़ा था मेरी ता'लीम को ले कर उसी लाला का अब मुझ को तो कर्ज़ा भी चुकाना है — Vikas Shah musafir
तुम मेरी पहली उल्फ़त हो जानाँ तुम को मेरा होकर ही रहना है — Vikas Shah musafir
आपसे मिल कर मुझे अच्छा लगा पर आप से थोड़ा अभी शर्मा रहा हूँ — Vikas Shah musafir
उसे जाना था तो जाने दिया रोका नहीं मैं ने ज़बरदस्ती का रिश्ता अब मुझे उस सेे नहीं रखना — Vikas Shah musafir
इश्क़ करते थे तभी सहना पड़ा मुझ को, नहीं तो दूर रहते जानते होते कि तुम ऐसा करोगी — Vikas Shah musafir
मुझ बिन रहना तुम तो सीख गई पर तुम बिन रहना सीख नहीं पाया मैं — Vikas Shah musafir
मुझ को भी ऐसी आँख अता कर मेरे ख़ुदा अंधा हो कर भी मुझ को ये नज़्ज़ारगी मिले — Vikas Shah musafir
समझा कर वो दोस्त थी मेरी जैसे कि वो अब दोस्त तेरा है — Vikas Shah musafir
तुम कभी नहीं आना चाहती हो मेरे घर दुख कभी नहीं होता गर मिला नहीं होता — Vikas Shah musafir

Ghazal

जो पहले तेरे होंठों पर थी वो मुस्कान देखेंगे तभी जा के कहीं हम फ़ायदा नुक़सान देखेंगे जो तेरे साथ चलती थीं वो राहें तेरी वीराँ हैं फ़ना हों तुझ में पहले हम तेरा ईमान देखेंगे छुपी है दर्द की दुनिया तेरे जज़्बात के पीछे अगर तू मुस्कुराएगा तो हम हर आन देखेंगे जो लफ़्ज़ों में नहीं आया वो सन्नाटा ही बोलेगा तेरी हर चुप्पी में क्या है वो अब तूफ़ान देखेंगे क़यामत जब ज़मीं पर आएगी इक रोज़ तन्हा सी तेरे एहसास में हम फिर वही अरमान देखेंगे जहाँ हर मोड़ पर तुझ सेे बिछड़ जाने का इक डर था उसी रस्ते से चल कर फिर कोई पहचान देखेंगे नज़र से गिर चुके हैं जो वही अब सर उठाएँ हैं चलो दुनिया की आँखों में नया इंसान देखेंगे जहाँ पर बिन कहे सब कुछ समझ लेते थे पहले ही उसी ख़ामोशी में है कैसा ये ऐलान देखेंगे जो कल तक मोम थे लफ़्ज़ों में वो पत्थर बने हैं अब तेरे ख़त में कहीं कोई छुपा अपमान देखेंगे — Vikas Shah musafir
ख़्वाबों में जब मैं तेरे गहरे उतर जाता हूँ तेरी इन आँखों की शबनम में बिखर जाता हूँ तेरी ख़ुशबू से महक उठते हैं वीराँ लम्हे रात के जादू से ख़्वाबों में उतर जाता हूँ तेरी ज़ुल्फ़ों की घनी छाँव में बैठा जब भी धूप को छू के तेरे रंग में भर जाता हूँ तेरी बातों में कोई रस है कि हर इक वो लफ़्ज़ दिल की धड़कन के तरानों में उतर जाता हूँ तेरी राहों में जो ठहरे उसे मंज़िल मिलती मैं मुसाफ़िर हूँ मगर दूर गुज़र जाता हूँ सुन मुसाफ़िर ये मुहब्बत में सुकूँ है हर ग़म इस को महसूस जो कर लूँ मैं बिखर जाता हूँ — Vikas Shah musafir

Nazm

''उल्फ़त की दुनिया'' लोगों से मैं ने सुना ये दुनिया उल्फ़त से भरी है और यहाँ पर इश्क़ पूजा जा रहा है तब यहाँ आने का सोचा पर यहाँ आया तो ये देखा वफ़ा की जिल्द में कोई क़लम से ख़ूँ छिड़कता फिर रहा है मैं ही इकलौता नहीं जो ग़म सुनाता इस जहाँ में फिर रहा हूँ और न जाने कितनी माँओं के जवाँ बेटों ने अपनी जान उल्फ़त में गँवा दी और वो चुप-चाप सब कुछ देखता हैं जिस सेे सब को आख़िरी उम्मीद रहती इक शिकायत है मुझे अल्लाह से अब हर तरफ़ से जो परेशाँ हो गया हो वो कहाँ जा सकता है गर तेरे दर में आएगा नइँ इस नई दुनिया में भी मुझ सेे मेरे ग़म का सबब जब पूछा लोगों ने यहाँ भी दर्द से मरने लगे लोग ये सुना है आख़िरी वा जिस के दर पाया गया मैं दास्ताँ सुन के मेरी वो ख़ूँ उगलने लग गया था दोस्त ने मेरे मुझे जब ये बताया तब मुझे ख़ुद पे यक़ीं आया कि सबके हाल मेरे जैसे ही हैं कोई ग़म में डूबा है तो कोई ग़म को पी चुका है हर किसी के चेहरे पे जाना सही नइँ इश्क़ उल्फ़त प्यार वादे जान लेवा सब के सब हैं इन में पड़ना हद से बाहर जाना अच्छा नइँ मेरी मानो तो ये दुनिया भी छोड़ो और किसी दुनिया में उल्फ़त को तलाशो गर ख़ुदा को ये लगा रहमत कि जाए तो करेगा और तुम को कामयाबी भी मिलेगी बस यक़ीं रखना ख़ुदा पर जब मिले तुम को ख़ुदा अपनी शिकायत करना उन सेे — Vikas Shah musafir