छोड़ पाया नहीं छोड़ता रह गया
दिल ये चुप चाप टूटा मेरा रह गया
चाँदनी रात में उस की यादें रहीं
जैसे सूरज कहीं डूबता रह गया
उस की शादी का था जश्न थे सब वहाँ
और मेरा ख़ूँ यहाँ खौलता रह गया
फूल महका किसी और के घर मेरा
माली मैं फूल को पालता रह गया
उस की ख़ुशबू जो कमरे में आई मेरे
ज़ख़्म उस के दिए नोचता रह गया
मेरी आँखों ने हर ख़्वाब जब खो दिए
फिर मैं सबकी नज़र चूमता रह गया
उस की मुस्कान देखी तो मैं रो उठा
बस मैं फिर ख़ुद को यूँ थामता रह गया
— Vikas Shah musafir















