तेरे हुस्न की हर अदा है शरारत
करे चाँदनी से जो खुल के बग़ावत
तेरी मुस्कुराहट की है चाल ऐसी
दिलों में जमाए नई इक हुकूमत
तेरे गेसुओं की वो लहराती बातें
हवा में करे हैं ख़ुलूसी शरारत
ये नज़रें तेरी जब मिलें नज़रों से तो
करे दिल ये तौबा मगर हो बग़ावत
लबों की वो हरकत वो चंचल अदाएँ
करे हैं यहाँ बेख़ुदी की हिफ़ाज़त
शरारत तेरी हर अदा की है मशहूर
तेरी चाल लगती है सब को इनायत
तेरा क़ातिलाना है अंदाज़ जामिल
बना देता है दिल को तेरी अमानत
— Vikas Shah musafir















