''उल्फ़त की दुनिया''

लोगों से मैं ने सुना ये दुनिया उल्फ़त से भरी है और यहाँ पर इश्क़ पूजा जा रहा है
तब यहाँ आने का सोचा
पर यहाँ आया तो ये देखा वफ़ा की जिल्द में कोई क़लम से ख़ूँ छिड़कता फिर रहा है
मैं ही इकलौता नहीं जो ग़म सुनाता इस जहाँ में फिर रहा हूँ
और न जाने कितनी माँओं के जवाँ बेटों ने अपनी जान उल्फ़त में गँवा दी
और वो चुप-चाप सब कुछ देखता हैं जिस से सब को आख़िरी उम्मीद रहती
इक शिकायत है मुझे अल्लाह से अब
हर तरफ़ से जो परेशाँ हो गया हो वो कहाँ जा सकता है गर तेरे दर में आएगा नइँ
इस नई दुनिया में भी मुझ से मेरे ग़म का सबब जब पूछा लोगों ने यहाँ भी दर्द से मरने लगे लोग
ये सुना है आख़िरी वा जिस के दर पाया गया मैं
दास्ताँ सुन के मेरी वो ख़ूँ उगलने लग गया था
दोस्त ने मेरे मुझे जब ये बताया तब मुझे ख़ुद पे यक़ीं आया कि सबके हाल मेरे जैसे ही हैं
कोई ग़म में डूबा है तो कोई ग़म को पी चुका है हर किसी के चेहरे पे जाना सही नइँ
इश्क़ उल्फ़त प्यार वादे जान लेवा सब के सब हैं इन में पड़ना हद से बाहर जाना अच्छा नइँ मेरी मानो तो ये दुनिया भी छोड़ो
और किसी दुनिया में उल्फ़त को तलाशो
गर ख़ुदा को ये लगा रहमत कि जाए तो करेगा और तुम को कामयाबी भी मिलेगी बस यक़ीं रखना ख़ुदा पर जब मिले तुम को ख़ुदा अपनी शिकायत करना उन से

— Vikas Shah musafir

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