हादसों से वो डर गया होगा
इस लिए वो मुकर गया होगा
इक शिकन थी जो छोड़नी थी उसे
बा'द उस के वो घर गया होगा
कुछ दिनों बा'द सब दिखेगा साफ़
छोड़ कर वो अगर गया होगा
बाप की चश्म तर गई होंगी
पुत्र जब छोड़ घर गया होगा
ऐसे कोई दुखी नहीं रहता
ज़ख़्म कोई उभर गया होगा
उस पे थीं भी बहुत निगहबानी
वो मुसाफ़िर तो मर गया होगा
— Vikas Shah musafir















