अराज़ी हूँ मैं मेरी कैफ़ियत मेरी निशानी है
सुख़न है बा'द उल्फ़त के जो उल्फ़त की कहानी है
हमें जो देख ले वो आ लगे सफ़ में हमारी बस
हमें दुनिया में अपनी एक ऐसी सफ़ बनानी है
मेरे जैसे चमकते चाँद पर धब्बा लगा डाला
मैं ख़ुश हूँ सोच कर ये इश्क़ की सच्ची निशानी है
जुदाई की उदासी चेहरे पे दिखने लगी थी साफ़
किसी ने फिर कहा आदत ये उस की ख़ानदानी है
— Vikas Shah musafir















