तेरी आँखों में इक नज़र देखा
जिस
में हर रूह का सफ़र देखा
रात थमने लगी तेरे ख़ातिर
चाँद को इतना बे-ख़बर देखा
तेरे लहजे में थी जो ख़ामोशी
हम ने उस
में भी इक शरर देखा
वक़्त गुज़रा तो मैं ने जाना ये
हर जगह बस तेरा हुनर देखा
— Vikas Shah musafir
जिस
में हर रूह का सफ़र देखा
रात थमने लगी तेरे ख़ातिर
चाँद को इतना बे-ख़बर देखा
तेरे लहजे में थी जो ख़ामोशी
हम ने उस
में भी इक शरर देखा
वक़्त गुज़रा तो मैं ने जाना ये
हर जगह बस तेरा हुनर देखा
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