जो पहले तेरे होंठों पर थी वो मुस्कान देखेंगे

तभी जा के कहीं हम फ़ायदा नुक़सान देखेंगे

जो तेरे साथ चलती थीं वो राहें तेरी वीराँ हैं
फ़ना हों तुझ
में पहले हम तेरा ईमान देखेंगे

छुपी है दर्द की दुनिया तेरे जज़्बात के पीछे
अगर तू मुस्कुराएगा तो हम हर आन देखेंगे

जो लफ़्ज़ों में नहीं आया वो सन्नाटा ही बोलेगा
तेरी हर चुप्पी में क्या है  वो अब तूफ़ान देखेंगे

क़यामत जब ज़मीं पर आएगी इक रोज़ तन्हा सी
तेरे एहसास में हम फिर वही अरमान देखेंगे

जहाँ हर मोड़ पर तुझ से बिछड़ जाने का इक डर था
उसी रस्ते से चल कर फिर कोई पहचान देखेंगे

नज़र से गिर चुके हैं जो वही अब सर उठाएँ हैं
चलो दुनिया की आँखों में नया इंसान देखेंगे

जहाँ पर बिन कहे सब कुछ समझ लेते थे पहले ही
उसी ख़ामोशी में है कैसा ये ऐलान देखेंगे

जो कल तक मोम थे लफ़्ज़ों में वो पत्थर बने हैं अब
तेरे ख़त में कहीं कोई छुपा अपमान देखेंगे

— Vikas Shah musafir

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