तारीफ़ें 'सरकार' अकेले करती हैं
    महफ़िल में पहचान बतानी पड़ती है
    Sandeep kushwaha
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    जन सेवा के मार्ग हज़ारों हैं लेकिन
    नेता जी को मोक्ष मिलेगा संसद में
    Sandeep kushwaha
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    वो एक वक़्त था उनको गुमान था हम पर
    ये एक वक़्त है हमसे नज़र नहीं मिलती
    Sandeep kushwaha
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    ये रोना,मुस्कुराना,आह भरना,और जिए जाना
    यही तो ज़िंदगी है ज़िंदगी कुछ और भी है क्या
    Sandeep kushwaha
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    हमको जिसकी तलाश थी अब तक
    कोई उसको तलाश बैठा है
    Sandeep kushwaha
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    एक ही बात का हमें डर है
    साँप के भेस में वो अजगर है

    जाने कब अक्ल आएगी उसको
    आदमी है प यार कमतर है

    इश्क़ में तुमको डूबना होगा
    इश्क़ दरिया नहीं समंदर है

    चीज़ वो ही पसंद आएगी
    अपनी औकात से जो बाहर है

    तूने चाहा, वो मिल गया तुझको
    यार कितना हसीं मुक़द्दर है
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    Sandeep kushwaha
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    ये तेरा रंग नया है तू सँभलियो प्यारे
    रंग उतरे तो ये दीवार बुरी लगती है
    Sandeep kushwaha
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    अब क्यूँ मेरे ज़ख़्म भला नासूर हुए ?
    मैं तो सबकी ख़ातिर मरहम होता हूँ
    Sandeep kushwaha
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    वो एक काम जो सौंपा गया था सूरज को
    मलाल है कि इक चराग़ कर रहा है उसे
    Sandeep kushwaha
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    रस्मन कब तक हाथ मिलाए जाते हम
    दिल मिलने की थोड़ी तो गुंजाइश हो
    Sandeep kushwaha
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