मुहब्बतों पे निसार चेहरों तुम्हीं से दुनिया टिकी हुई है
मुहब्बतों को बनाए रखिए मुहब्बतों से ही रोशनी है
उदास चेहरों से आप उनकी उदासियों की वजह न पूँछे
उदास रहने के कुछ मज़े हैं कोई लहर है लहर बड़ी है
कोई अगर बद-दु'आ भी दे तो तू इसका इतना मलाल मत कर
कई दुआएं भी साथ होंगी ये ज़िंदगी है ये लाज़मी है
वो कितने दीपक जो आँधियों की ही सोहबतों में बड़े हुए हैं
उन्हें बुझाने की कोशिशों में हवा की साज़िश लगी हुई है
मैं जिसके ख़ातिर चराग़ लेकर भटक रहा था गली-गली में
वो मिल गया तो समझ में आया वो मेरे जैसा ही आदमी है
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