मोहब्बतों पे निसार चेहरों तुम्हीं से दुनिया टिकी हुई है
मोहब्बतों को बनाए रखिए मोहब्बतों से ही रौशनी है
उदास चेहरों से आप उन की उदासियों की वजह न पूँछे
उदास रहने के कुछ मज़े हैं कोई लहर है लहर बड़ी है
कोई अगर बद-दु'आ भी दे तो तू इस का इतना मलाल मत कर
कई दुआएँ भी साथ होंगी ये ज़िंदगी है ये लाज़मी है
वो कितने दीपक जो आँधियों की ही सोहबतों में बड़े हुए हैं
उन्हें बुझाने की कोशिशों में हवा की साज़िश लगी हुई है
मैं जिस के ख़ातिर चराग़ ले कर भटक रहा था गली-गली में
वो मिल गया तो समझ में आया वो मेरे जैसा ही आदमी है
— Sandeep kushwaha















