शांत दरिया के पास बैठा है
या'नी लड़का उदास बैठा है
होश दुनिया को बाँटता था जो
आज ख़ुद बद-हवा से बैठा है
वो जो दिखता नहीं हमें लेकिन
वो कहीं आस-पास बैठा है
तृप्त दिखने का ढोंग मत करिए
दिल अगर ले के प्यास बैठा है
वो मेरा भी तो ख़ास होता था
जो तेरा बन के ख़ास बैठा है
— Sandeep kushwaha















