Sandeep kushwaha

Sandeep kushwaha

@Sandeep_1999

Sandeep kushwaha shayari collection includes sher, ghazal and nazm available in Hindi and English. Dive in Sandeep kushwaha's shayari and don't forget to save your favorite ones.

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  • Sher(17)
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Sher

कोई बात नहीं कहने वाले लड़के बातों का अंबार छुपाए रखते हैं — Sandeep kushwaha
हुस्न लुटाएगा ख़ुशबू कब तक हम ने नदियों को भी जंगल होते देखा है — Sandeep kushwaha
जन सेवा के मार्ग हज़ारों हैं लेकिन नेता जी को मोक्ष मिलेगा संसद में — Sandeep kushwaha
ये रोना,मुस्कुराना,आह भरना,और जिए जाना यही तो ज़िंदगी है ज़िंदगी कुछ और भी है क्या — Sandeep kushwaha
ये तेरा रंग नया है तू सँभलियो प्यारे रंग उतरे तो ये दीवार बुरी लगती है — Sandeep kushwaha
वो एक काम जो सौंपा गया था सूरज को मलाल है कि इक चराग़ कर रहा है उसे — Sandeep kushwaha
अपनी नाकामी से भी ख़ुश होता हूँ नाकामी के क़िस्से अच्छे होते हैं — Sandeep kushwaha
रस्मन कब तक हाथ मिलाए जाते हम दिल मिलने की थोड़ी तो गुंजाइश हो — Sandeep kushwaha
रिश्तों में अब दूरी रखना जायज़ भी है ज़्यादा ज़ूम करे, फ़ोटो धुँदला जाती है — Sandeep kushwaha
ता'रीफ़ें 'सरकार' अकेले करती हैं महफ़िल में पहचान बतानी पड़ती है — Sandeep kushwaha
वो एक वक़्त था उन को गुमान था हम पर ये एक वक़्त है हम सेे नज़र नहीं मिलती — Sandeep kushwaha
हम को जिस की तलाश थी अब तक कोई उस को तलाश बैठा है — Sandeep kushwaha
अब क्यूँँ मेरे ज़ख़्म भला नासूर हुए ? मैं तो सबकी ख़ातिर मरहम होता हूँ — Sandeep kushwaha
जुगनुओं के वास्ते सूरज से झगड़ा मोल ले ये हिमाक़त भी किसी सूरज के बस की बात है — Sandeep kushwaha
बिकने को तो बिकती है खु़द्दारी भी बस थोड़ा-सा रेट ज़ियादा करती है — Sandeep kushwaha

Ghazal

मोहब्बतों पे निसार चेहरों तुम्हीं से दुनिया टिकी हुई है मोहब्बतों को बनाए रखिए मोहब्बतों से ही रौशनी है उदास चेहरों से आप उन की उदासियों की वजह न पूँछे उदास रहने के कुछ मज़े हैं कोई लहर है लहर बड़ी है कोई अगर बद-दु'आ भी दे तो तू इस का इतना मलाल मत कर कई दुआएँ भी साथ होंगी ये ज़िंदगी है ये लाज़मी है वो कितने दीपक जो आँधियों की ही सोहबतों में बड़े हुए हैं उन्हें बुझाने की कोशिशों में हवा की साज़िश लगी हुई है मैं जिस के ख़ातिर चराग़ ले कर भटक रहा था गली-गली में वो मिल गया तो समझ में आया वो मेरे जैसा ही आदमी है — Sandeep kushwaha