एक ही बात का हमें डर है
साँप के भेस में वो अजगर है
जाने कब अक्ल आएगी उस को
आदमी है प यार कमतर है
इश्क़ में तुम को डूबना होगा
इश्क़ दरिया नहीं समुंदर है
चीज़ वो ही पसंद आएगी
अपनी औकात से जो बाहर है
तू ने चाहा, वो मिल गया तुझ को
यार कितना हसीं मुक़द्दर है
— Sandeep kushwaha















