Sohil Barelvi

Sohil Barelvi

@sohil_barelvi

Sohil Barelvi shayari collection includes sher, ghazal and nazm available in Hindi and English. Dive in Sohil Barelvi's shayari and don't forget to save your favorite ones.

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Sher

जाने क्या क्या हैं हसरतें मेरी बंद कमरे में ज़िन्दगी काटूँ — Sohil Barelvi
कानों पे हाथ रख लिए ख़ामोश हो गया सुन ने की हद हुई तो मुझे बोलना पड़ा — Sohil Barelvi
ऐसे भी लोग हैं जो मुझे दौर-ए-आज में सच का दिलासा दे गए पर सच नहीं कहा — Sohil Barelvi
जब से नाराज़ हो गया साक़ी शा'इरी ख़त्म हो गई मेरी — Sohil Barelvi
दिल को सुकूँ मिलेगा बहुत मुन्तज़िर था पर मुझ पर अज़ाब टूट रहे माह-ए-इश्क़ में — Sohil Barelvi
मेरा भी वक़्त ठीक नहीं चल रहा है और वो भी फ़क़ीर हो गए जो मेरे साथ थे — Sohil Barelvi
और कुछ रोज़ तमन्नाई रहेगा ये दिल एक दो रोज़ में आदत नहीं जाती कोई — Sohil Barelvi
देर से इतनी अपने घर पहुँचा घर में जो था वो अब रहा ही नहीं — Sohil Barelvi
तिरा साथ क़िस्मत नहीं दे कभी तो मिरी जाँ समझना मिरे साथ भी कुछ बुरा हो रहा है — Sohil Barelvi
जब निकलता हूँ मैं कभी बाहर ख़ुद को कमरे में छोड़ जाता हूँ — Sohil Barelvi
अचानक कुछ किसी दिन हो गया तो धरी रह जाएगी सारी निशानी — Sohil Barelvi
इक दूसरे से दूर रहेंगे तमाम उम्र ये जानते हुए भी बहुत पास आ गए — Sohil Barelvi
हो सके तो क़रीब आ जाओ तुम बहुत दूर दूर रहते हो — Sohil Barelvi
उस नशे का ग़ुलाम हूँ अब भी जिस की आदत लगाई थी तू ने — Sohil Barelvi
सैकड़ों हाथ किसी को न मुयस्सर हों ख़ुदा एक इंसान ही इंसान की उँगली पकड़े — Sohil Barelvi
मुझ में परिंदे गुम थे परिंदों में गुम था मैं इक दिन कहीं से बाग़ में सय्याद आ गया — Sohil Barelvi
दुनिया का इक शख़्स गया है सब से ज़ियादा मुझ को दुख है — Sohil Barelvi
ख़्वाब कितना भी हो हसीं सोहिल नींद खुलने पे टूट जाता है — Sohil Barelvi
दुनिया से मुँह मोड़ ले लेकिन अपने घर तो जाना होगा — Sohil Barelvi

Ghazal

क्या क्या और नज़र-अंदाज़ करूँँगा मैं कितने पत्थर दिल पर और रखूँगा मैं कूज़ा-गर की मेहनत काम आ जाएगी एक न इक दिन कुछ तो यार बनूँगा मैं एक न इक दिन तू भी मुझ को समझेगा देखना इक दिन दिल की बात कहूँगा मैं तू जिस भीड़ में मुझ को ढूँढ़ रहा है अब सब से हटके थोड़ी दूर मिलूँगा मैं इतने रस्तों से अब वाक़िफ़ हूँ यारों मंज़िल पालूँगा जिस ओर चलूँगा मैं सब के मन की कर के सुन के पछताया अब के अपने दिल की यार सुनूँगा मैं जिस दिन तेरे काम नहीं आ पाऊँगा उस दिन तेरे दिल को बहुत चुभूँगा मैं मुझ से सोहिल जिस जिस ने मुँह मोड़ा है सब से इक दिन खुल कर यार मिलूँगा मैं — Sohil Barelvi
कुछ घड़ी को ही यहाँ कोई भला लगता है चार दिन बा'द तो मेहमान बुरा लगता है फिर बताऍंगे गुज़र जाने दो पूरा सावन पहली बरसात में सब कुछ ही नया लगता है ज़हर के घूँट पिए जाते हैं हँसते हँसते इश्क़ सच्चा हो तो महबूब ख़ुदा लगता है तू मुझे वक़्त न दे कोई परेशानी नहीं ग़ैर के मुँह लगा करता है बुरा लगता है वर्ना ये टीस नहीं उठती हमारे दिल में ऐसा लगता है कोई अपना ख़फ़ा लगता है जो रहा करता है मतलब पे हमेशा मौक़ूफ़ ऐसा इंसान मुझे सच में बुरा लगता है चारा-साज़ी में कोई और नहीं है तुझ सा तेरे हाथों में मुझे ज़हर दवा लगता है अपने किरदार से बाहर नहीं जाना सोहिल एक किरदार में तू सब से जुदा लगता है — Sohil Barelvi
नहीं होता हूँ मेरी जान नहीं होता हूँ अब मैं पत्थर हूँ परेशान नहीं होता हूँ बात मेरी ही चुभा करती है मुझ को अक्सर तेरी बातों पे मैं हैरान नहीं होता हूँ इस लिए भी नहीं खुल पाता हूँ मैं यारो में अपनी हालत से मैं अंजान नहीं होता हूँ ख़ाक होने को हूँ मैं आज मगर देखो तो ख़ाक होने पे भी वीरान नहीं होता हूँ मेहरबानी कोई मुझ पर नहीं करता है अब अब किसी पर मैं भी क़ुर्बान नहीं होता हूँ देख कर रौनक़-ए-दुनिया ये किया तय मैं ने फैलने का कोई सामान नहीं होता हूँ अब तसव्वुर में नहीं कोई बसाता मुझ को अब किसी नज़्म का उनवान नहीं होता हूँ मैं बनाता हूँ हमेशा के लिए दिल में जगह चार छह रोज़ का मेहमान नहीं होता हूँ — Sohil Barelvi
कुछ दिलों तक तो मेरी बात को जाने देना मैं अगर शे'र सुनाऊँ तो सुनाने देना कोई तफ़रीह दिखाना न दिखाने देना पेट भरना हो जिसे उस को कमाने देना इस ज़माने में कहीं आप को रहना हो अगर दर्द दिल का कभी चेहरे पे न आने देना कोई आए कि नहीं दिल की तसल्ली के लिए गर मैं आवाज़ लगाऊँ तो लगाने देना देखते रहना चमक जाएगी फूटी क़िस्मत नाम लिख लिख के मुझे उस का मिटाने देना आख़िरी रात मुझे करना है दुनिया का हिसाब आख़िरी रात ख़ुदा नींद न आने देना अब मैं इस काम में माहिर हूँ तुम्हारी ही तरह अब बहाना न कोई मुझ को बनाने देना क्या पता आख़िरी हो अपनी मुलाक़ात यही देख इस बार मुझे दूर न जाने देना आँख से आँख मिला कर नहीं जाना जानाँ मेरी साॅंसों को भी रफ़्तार में आने देना — Sohil Barelvi
जब भी घर के दर-ओ-दीवार से उक्ताते हैं लोग दरिया की तरफ़ ख़ुद ही चले जाते हैं जो चले जाते नहीं आते दोबारा मुड़ कर वहम आता है फ़क़त लोग नहीं आते हैं फिर समझते हैं इसी सम्त है अपना सब कुछ आप की सम्त ही जब यार क़दम जाते हैं वाक़िआ है ये तसव्वुर के जहाँ का जानाँ अपनी उँगली से तिरी ज़ुल्फ़ को सहलाते हैं हम गरीबों की तमन्नाएँ हैं बेवा जैसी चाहते रहते हैं कुछ लुत्फ़ नहीं पाते हैं संग-ए-मरमर की सड़क रास नहीं आती हमें ठोकरें जान के हम लोग यहाँ खाते हैं दिल को तकलीफ़ तो होती है मगर हम सोहिल एक क़तरा भी निगाहों में नहीं लाते हैं — Sohil Barelvi
कोई झगड़ा अब न होगा यार से प्यार की बातें करेंगे प्यार से मुश्किलों से मुश्किलों को हल किया ख़ार को मैं ने निकाला ख़ार से आज़माती हैं कभी तो कश्तियाँ पार सब होते नहीं पतवार से अपनी धुन में इक परिंदा कह गया ला दे इक जंगल मुझे बाज़ार से आज फिर कुछ लोग मुझ को याद आए आज फिर कुछ लोग बोले प्यार से कोई तो होगा हमारा फ़िक्र-मंद कोई तो आवाज़ दे उस पार से चंद साँसों के सहारे है मगर कौन मिलने आ रहा बीमार से सामने से अनसुना कोई करे कोई सुनता है पस-ए-दीवार से कौन अपना या पराया कौन है सब नज़र आने लगे आसार से अब हमारी क्या सुनोगे जब तुम्हें बात करनी है किसी अग़्यार से सब्र से कुछ काम लो सोहिल मियाँ और भी आने हैं दिन दुश्वार से — Sohil Barelvi
बस यही सोच के दिल मेरा दुखा करता है मेरा अपना ही मिरे साथ दग़ा करता है लाख मुह फेर ले कोई या बना ले बातें देखने वालों को सब साफ़ दिखा करता है दुश्मनी हो या मोहब्बत हो मगर ज़ाहिर हो आग कम हो तो धुआँ और उठा करता है तेरे दीदार से आती थी चमक आँखों में तेरा चेहरा मेरी आँखों में रहा करता है बातों बातों में बहुत काम की बातें कर दूँ पर यहाँ कौन मेरी बात सुना करता है वो मुसीबत में बढ़ा देता है हिम्मत मेरी मोजिज़ा वक़्त पे हर बार ख़ुदा करता है तंग हालात में हूँ और सियह रात में हूँ ऐसे हालात में दिल और दुखा करता है सौ में इक-आध भला होता है वरना 'सोहिल' जो मदद करता है एहसान किया करता है — Sohil Barelvi
कहीं तुम्हारा न दिल लगेगा तो क्या करोगे कोई तुम्हारी न इक सुनेगा तो क्या करोगे ख़मोश हैं हम कि वज्ह है कुछ मगर किसी दिन कोई तुम्हें भी बुरा कहेगा तो क्या करोगे अगरचे सब कुछ है ठीक लेकिन कभी कहीं पर जो काम कोई नहीं बनेगा तो क्या करोगे जहाँ में कोई हमारे जैसा नहीं है दूजा किसी पे गर बस नहीं चलेगा तो क्या करोगे अभी तो महफ़िल में लोग हैं कुछ तो है ये रौनक़ क़रीब कोई नहीं रहेगा तो क्या करोगे बुरा समय है जो आज हम पर हँसे हो तुम भी अगर तुम्हें भी समय ठगेगा तो क्या करोगे सितम जो तुम ने किए हैं हम पर ये फ़र्ज़ कर लो तुम्हें भी इस का सिला मिलेगा तो क्या करोगे — Sohil Barelvi
अब फ़लक से तो नहीं कोई याँ आने वाला कोई टकराएगा शायद कि ज़माने वाला जो नज़र फेर के बैठे हैं वही लोग हैं बस और कोई नहीं दिल मेरा दुखाने वाला रूठ कर जाते हुए लोग बहुत देखे मगर अब तलक देखा नहीं नाज़ उठाने वाला घर की रौनक़ भी नहीं देख सका घर आ कर कितनी ख़ुशियों से है महरूम कमाने वाला इस लिए भी मैं नहीं होता किसी से नाराज़ जानता हूँ कि नहीं कोई मनाने वाला इस तरह ज़िंदगी इक रंग में ढाली अपनी चढ़ नहीं पाया कभी रंग ज़माने वाला दास्ताँ सुनता रहा बैठ के ग़म की दिल की चारा-गर हम को मिला दर्द बढ़ाने वाला जितने इल्ज़ाम हों सर आप के आ जाते हैं ऐसा माहौल बना देता है जाने वाला — Sohil Barelvi
कोई भी प्यारा दिखाई देगा तुम्हारा चेहरा नज़र में होगा कोई सितारा दिखाई देगा तुम्हारा चेहरा नज़र में होगा हमें सॅंभाला है मुश्किलों में हमेशा तुम ने सो मुश्किलों में कोई हमारा दिखाई देगा तुम्हारा चेहरा नज़र में होगा अगर मुसीबत कभी जो आए मुसीबतों में कोई भी रस्ता कोई इशारा दिखाई देगा तुम्हारा चेहरा नज़र में होगा तुम्हारी आँखें हमारी आँखों ने ऐसे देखीं कि अब इन्हें बस कोई नज़ारा दिखाई देगा तुम्हारा चेहरा नज़र में होगा तुम्हारा चेहरा तुम्हारा चेहरा तुम्हारा चेहरा है याद अब बस जो इस से प्यारा दिखाई देगा तुम्हारा चेहरा नज़र में होगा हमारी आँखों को और कुछ भी न देखना है सिवा तुम्हारे कि जो भी यारा दिखाई देगा तुम्हारा चेहरा नज़र में होगा — Sohil Barelvi

Nazm