एक दीवान ले के बैठे हैं
क्या ही सामान ले के बैठे हैं
लौ हथेली पे जल रही है और
दिल में तूफ़ान ले के बैठे हैं
बस मुझे छोड़ कर जहाँ में सब
काम आसान ले के बैठे हैं
आप के दम से हूँ मैं जान-ए-मन
आप ही जान ले के बैठे हैं
ज़ब्त कर के हज़ार दुख दिल में
एक मुस्कान ले के बैठे हैं
बाद गिनने के कम नहीं होते
तारे तो जान ले के बैठे हैं
होंठ सीकर गली से गुज़रेंगे
सब मकाँ कान ले के बैठे हैं
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