कोई इस्तिख़ारा इशारा नहीं है
मेरे ज़ख़्म का कोई चारा नहीं है
तुम्हारे मुताबिक नहीं चल सकेगा
ये दिल है हमारा तुम्हारा नहीं है
यूँँ देखें तो मेरा सभी कुछ लुटा है
मुझे इक तरह से ख़सारा नहीं है
मैं फ़रहाद-ओ-मजनूँ के जैसा नहीं था
सो तुझ को सर-ए-रह पुकारा नहीं है
फ़क़त हाथ वहम-ओ-गुमाँ में उठे हैं
कहीं कोई टूटा सितारा नहीं है
सिवा कोई जिस के नहीं है हमारा
वही शख़्स सोहिल हमारा नहीं है
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