Promise Shayari - Heartfelt verses about commitment, trust, and the beauty of keeping your word.

Discover a beautiful collection of Promise Shayari that captures the essence of commitment. Whether it is a vow to stay forever or a simple word given in love, these verses reflect the depth of trust and loyalty in every relationship.

What is Promise Shayari?

Promise Shayari, often known as Wada Shayari, is a form of poetry that focuses on themes of commitment, vows, and the importance of keeping one's word in love and friendship.

Promise Shayari on Love

Deeply emotional verses about making lifelong vows and staying together through every storm of life.

तुझे मेरी मोहब्बत पे ऐतिबार हो जाना मुमकिन नहीं है गधे का समझदार हो जाना — Bhavesh kumar
ग़लती मिरी है मुझ को तिरा ऐतिबार था मेरी यही सज़ा है मुझे शर्मसार कर — Amaan Pathan
ख़ुद से ज़्यादा कभी किसी पर सुनो अब शजर ऐतिबार मत करना — Shajar Abbas
क्या ख़बर कब ठहरने लग जाए साँस का ऐतिबार कौन करे — shahnawaaz khan
अब इन हुदूद में लाया है इंतिज़ार मुझे वो आ भी जाएँ तो आए न ऐतिबार मुझे — Khumar Barabankvi
करूँँ तो कैसे करूँँ तुझ पे मैं यक़ीन बता नहीं है ख़ुद पे भी जब कोई ऐतिबार मुझे — Amaan Pathan
मैं जिस को जान से ज़्यादा अज़ीज़ रखता था उसी ने तोड़ दिया हाए ऐतिबार मेरा — Shajar Abbas
ख़ुदा के वास्ते मत लफ़्ज़-ए-ऐतबार तू बोल ये लफ़्ज़ अच्छा नहीं लगता है लबों पे तेरे — Shajar Abbas

Strengthen your bond with these beautiful love shayari .

Wada Shayari in Hindi

Classic and contemporary Hindi poetry focusing on the sacredness of a given word and the beauty of trust.

तुझे तेरी मोहब्बत की क़सम है अब मिटाना है गुमाँ सब इश्क़ को ले कर — Amanpreet singh
मिला ना अब नज़र को, बोल भी कुछ क़सम है बोल उल्फ़त थी, नहीं ना — "Nadeem khan' Kaavish"
दिल को अब बेक़रार मत करना हुस्न पर ऐतिबार मत करना — Gulshan
यक़ीन तुझ को नहीं है जो इश्क़ पर मेरे मुझे भी तेरी वफ़ाओं पे ऐतिबार नहीं — A R Sahil "Aleeg"
हम को क़सम से यार ऐसी जानकारी थी नहीं कहते थे जिस को जान वो लड़की हमारी थी नहीं — Aqib khan
अगर की आपने अब ऐतिबार की बातें क़सम से आप के मैं मुँह को नोच डालूँगा — Shajar Abbas
डूब चुका हूँ इश्क़ में तेरे फिर वादे-पे-वादा है क्या — Navneet krishna
क़सम खाने से कोई मरता होता तो क़सम शिव की मैं कब का मर गया होता — Prit
इश्क़ पर ऐतिबार किस को है और फिर बार-बार किस को है — Nit

A promise is nothing without aitbaar shayari to back it up.

Promise Shayari on Life

Philosophical takes on the promises we make to ourselves and the journey of staying true to our principles.

ये जिस्मों को तुम ने लिबासों में रख कर हया की है देखो क़सम झूठी खाई — Kashif Hussain Kashif
उसे भी धोका मिलेगा यक़ीन है मुझ को भरोसा वो भी किसी पर तो कर रहा होगा — Aqib Jawed
इस से पहले कि बे-वफ़ा हो जाएँ क्यूँँ न ऐ दोस्त हम जुदा हो जाएँ — Ahmad Faraz
तेरे ख़त आज लतीफ़ों की तरह लगते हैं ख़ूब हँसता हूँ जहाँ लफ़्ज़-ए-वफ़ा आता है — Zubair Ali Tabish
कँवल से है रुख़ और नदी सी अधर है ख़ुदा की क़सम तेरा मुखड़ा ग़ज़ब का — Sachin kumar
क़र्ज़ दशरथ के वचन का यूँँ चुकाया राम ने सर झुकाया और ख़ुशी से राजधानी छोड़ दी — Shakir Dehlvi
अगर है इश्क़ सच्चा तो निगाहों से बयाँ होगा ज़बाँ से बोलना भी क्या कोई इज़हार होता है — Bhaskar Shukla
डरा-धमका के तुम हम सेे वफ़ा करने को कहते हो कहीं तलवार से भी पाँव का काँटा निकलता है — Munawwar Rana
इस ज़माने को ज़माने की अदा आती है और इक हम है हमें सिर्फ़ वफ़ा आती है — Zubair Ali Tabish

Read about the journey of keeping vows in zindagi shayari .

Promise Shayari with Meaning

Thoughtful poetry that explores the weight of words and what it truly means to commit to someone.

तिरे जमाल की तस्वीर खींच दूँ लेकिन ज़बाँ में आँख नहीं आँख में ज़बान नहीं — Jigar Moradabadi
वो नशा है के ज़बाँ अक़्ल से करती है फ़रेब तू मिरी बात के मफ़्हूम पे जाता है कहाँ — Pallav Mishra
ये सोच कर कोई अहद-ए-वफ़ा करो हम सेे हम एक वादे पे 'उम्रें गुज़ार देते हैं — Waseem Barelvi
अपनी ज़बाँ से कुछ न कहेंगे चुप ही रहेंगे आशिक़ लोग तुम से तो इतना हो सकता है पूछो हाल बेचारों का — Ibn E Insha
दीवारें छोटी होती थीं लेकिन पर्दा होता था तालों की ईजाद से पहले सिर्फ़ भरोसा होता था — Azhar Faragh
दोस्त ने दिल को तोड़ के नक़्श-ए-वफ़ा मिटा दिया समझे थे हम जिसे ख़लील का'बा उसी ने ढा दिया — Arzoo Lakhnavi
चारों तरफ़ बिखर गईं साँसों की ख़ुशबुएँ राह-ए-वफ़ा में आप जहाँ भी जिधर गए — Kumar Vishwas
ज़बाँ हमारी न समझा यहाँ कोई 'मजरूह' हम अजनबी की तरह अपने ही वतन में रहे — Majrooh Sultanpuri
जो इक ख़ुदा नहीं मिलता तो इतना मातम क्यूँँ यहाँ तो कोई मिरा हम-ज़बाँ नहीं मिलता — Kaifi Azmi
हैं बाशिंदे उसी बस्ती के हम भी सो ख़ुद पर भी भरोसा क्यूँ करें हम — Jaun Elia
फिर चाहे तो न आना ओ आन बान वाले झूटा ही वअ'दा कर ले सच्ची ज़बान वाले — Arzoo Lakhnavi
या तेरे अलावा भी किसी शय की तलब है या अपनी मोहब्बत पे भरोसा नहीं हम को — Shahryar

When trust is broken, you might relate to dhokha shayari .

Broken Promise Shayari

Expressing the heartbreak and disappointment that follows when a sacred vow is left unfulfilled.

है दुख तो कह दो किसी पेड़ से परिंदे से अब आदमी का भरोसा नहीं है प्यारे कोई — Madan Mohan Danish
आसान नहीं मरहला-ए-तर्क-ए-वफ़ा भी मुद्दत हुई हम इस को भुलाने में लगे हैं — Hafeez Banarasi
दिल से निकलेगी न मर कर भी वतन की उल्फ़त मेरी मिट्टी से भी ख़ुशबू-ए-वफ़ा आएगी — Lal Chand Falak
तेरी रंजिश खुली तर्ज-ए-बयाँ से न थी दिल में तो क्यूँँ निकली ज़बाँ से — Dagh Dehlvi
मुझे छोड़ दे मेरे हाल पर तिरा क्या भरोसा है चारा-गर ये तिरी नवाज़िश-ए-मुख़्तसर मेरा दर्द और बढ़ा न दे — Shakeel Badayuni
हम हैं हिन्दी और हमारा मुल्क है हिन्दोस्ताँ हिन्द में पैदा तसव्वुफ़ के ज़बाँ-दाँ कीजिए — Sahir Dehlavi
उस दुश्मन-ए-वफ़ा को दुआ दे रहा हूँ मैं मेरा न हो सका वो किसी का तो हो गया — Hafeez Banarasi
हम से कोई तअल्लुक़-ए-ख़ातिर तो है उसे वो यार बा-वफ़ा न सही बे-वफ़ा तो है — Jameel Malik
'शाद' ग़ैर-मुमकिन है शिकवा-ए-बुताँ मुझ से मैं ने जिस से उल्फ़त की उस को बा-वफ़ा पाया — Shaad Arfi
कभी ये भी नहीं पूछा है गर्दन पे निशाँ कैसा हमें अंधी मोहब्बत थी हमें अंधा भरोसा था — Shayra kirti
आज भी 'प्रेम' के और 'कृष्ण' के अफ़्साने हैं आज भी वक़्त की जम्हूरी ज़बाँ है उर्दू — Ata Abidi
ख़ुशबू से किस ज़बान में बातें करेंगे लोग महफ़िल में ये सवाल तुझे देख कर हुआ — Mansoor Usmani

Explore the pain of broken trust in bewafai shayari .

2 Line Promise Shayari

Short and impactful couplets that convey the strength of a promise in just a few words.

तुम मिरी ज़िंदगी हो ये सच है ज़िंदगी का मगर भरोसा क्या — Bashir Badr
दिल को तेरी चाहत पे भरोसा भी बहुत है और तुझ से बिछड़ जाने का डर भी नहीं जाता — Ahmad Faraz
मिरी ज़बान के मौसम बदलते रहते हैं मैं आदमी हूँ मिरा ए'तिबार मत करना — Asim Wasti
वो कहते हैं मैं ज़िंदगानी हूँ तेरी ये सच है तो उन का भरोसा नहीं है — Aasi Ghazipuri
जान तुझ पर कुछ ए'तिमाद नहीं ज़िंदगानी का क्या भरोसा है — Khan Arzoo Sirajuddin Ali
हिम्मत, ताकत, प्यार, भरोसा जो है सब इनसे ही है कुछ नंबर हैं जिन पर मैं ने अक्सर फोन लगाया है — Pratap Somvanshi
जब अपना दिल ख़ुद ले डूबे औरों पे सहारा कौन करे कश्ती पे भरोसा जब न रहा तिनकों पे भरोसा कौन करे — Anand Narayan Mulla
झूट पर उस के भरोसा कर लिया धूप इतनी थी कि साया कर लिया — Shariq Kaifi
हर-चंद ए'तिबार में धोके भी हैं मगर ये तो नहीं किसी पे भरोसा किया न जाए — Jaan Nisar Akhtar
हम आज राह-ए-तमन्ना में जी को हार आए न दर्द-ओ-ग़म का भरोसा रहा न दुनिया का — Waheed Quraishi
उस की ख़्वाहिश पे तुम को भरोसा भी है उस के होने न होने का झगड़ा भी है लुत्फ़ आया तुम्हें गुमरही ने कहा गुमरही के लिए एक ताज़ा ग़ज़ल — Irfan Sattar

Promise Shayari for Status

Handpicked lines perfect for your WhatsApp status to show the world your loyal and committed side.

मिल गए थे एक बार उस के जो मेरे लब से लब उम्र भर होंटों पे अपने मैं ज़बाँ फेरा किया — Jurat Qalandar Bakhsh
रखे है लज़्ज़त-ए-बोसा से मुझ को गर महरूम तो अपने तू भी न होंटों तलक ज़बाँ पहुँचा — Jurat Qalandar Bakhsh
तुम्हारी ख़ानदानी रस्म रस्म-ए-बेवफ़ाई है हमीं पागल थे जो तुम पर भरोसा कर लिया हम ने — Shajar Abbas
तिरा दिल मुस्कुराएगा दुआ है हमें भी तो भरोसा है ख़ुदा पर — Meem Alif Shaz
बेशक तू बे-वफ़ा का सनम नाम दे मुझे बा'द आज़माने के मगर इल्ज़ाम दे मुझे — Ajeetendra Aazi Tamaam
क्या ख़ूब तुम ने ग़ैर को बोसा नहीं दिया बस चुप रहो हमारे भी मुँह में ज़बान है — Mirza Ghalib
फिर चाहे तो न आना ओ आन बान वाले झूटा ही वअ'दा कर ले सच्ची ज़बान वाले — Arzoo Lakhnavi
जिस की फ़ितरत ही बे वफ़ाई हो उस सेे उम्मीद-ए-वफ़ा क्या करना — Ajeetendra Aazi Tamaam
भरोसा मुझ पे रक्खो और कुछ पल रुका हूँ, मैं अभी हारा नहीं हूँ — Divy Kamaldhwaj
बे-वफ़ा शख़्स तेरे होंठों पे ये लफ़्ज़-ए-वफ़ा सच बताऊँ मुझे बिल्कुल नहीं अच्छा लगता — Shajar Abbas

Short Promise Captions

One-liners and brief thoughts on commitment for your next Instagram or Facebook post.

सब इंतिज़ार में थे कब कोई ज़बान खुले फिर उस के होंठ खुले और सबके कान खुले — Umair Najmi
तुम्हारा नाम जैसे एक मीठे पान का बीड़ा ज़बाँ पे रख लिया है रूह मेरी सुर्ख़ है तब से — Umesh Maurya
भरोसा तोड़ कर अच्छा किया तुम ने मैं दुनिया पर भरोसा करने वाला था — Aatish Alok
कोई वा'दा न देंगे दान में क्या झूट तक अब नहीं ज़बान में क्या — Tufail chaturvedi
ये और बात अनोखी सी प्यास रहने लगी मेरी ज़बान पे उस की मिठास रहने लगी — Afzaal Naveed
है नाज़ मुझ को अपनी हिंदी ज़बाँ पे यारो हिंदी हैं हम वतन हैं ये देश सब सेे आला — Dr Mohsin Khan
वो जो ख़्वाब थे मेरे ज़ेहन में न मैं कह सका न मैं लिख सका कि ज़बाँ मिली तो कटी हुई जो क़लम मिला तो बिका हुआ — Iqbal Ashhar
इज़हार पे भारी है ख़मोशी का तकल्लुम हर्फ़ों की ज़बाँ और है आँखों की ज़बाँ और — Haneef akhgar
तुम्हारा नाम लिया था कभी मोहब्बत से मिठास उस की अभी तक मेरी ज़बान में है — Abbas Dana
उस साँवले से जिस्म को देखा ही था कि बस घुलने लगे ज़बाँ पे मज़े चाकलेट के — Shahid Kabir
जो है ज़बाँ पे दिल को नहीं उस सेे फ़ाएदा जो दिल में है वो ला नहीं सकते ज़बान पर — Akbar Allahabadi

FAQs

Yes, these verses are perfect for Promise Day celebrations to express your dedication and sincere intentions to your partner.
In Urdu poetry, a 'Wada' symbolizes the integrity of a lover. Poets often write about the joy of a kept promise or the pain of a broken one to highlight emotional depth.
Absolutely. We have included 2-line and short promise captions that are concise yet impactful for social media posts.
Commonly used words include 'Kasam' (vow), 'Aitbaar' (trust), 'Nibhana' (to fulfill), and 'Iqrar' (confession or agreement).
Yes, our collection covers various relationships, emphasizing the loyalty and trust found in true friendship.