नादानी ये ज़रा सी ले ले न जान मेरीफूलों से भर रखी है मैं ने मयान मेरीहैं आप को जो शिकवे मेरी ज़बान से जाँतो काट लें लबों से अपने ज़बान मेरी— vivek sahu