Corruption Shayari - Poetic Verses Highlighting Social Injustice

Explore a powerful collection of Corruption Shayari that exposes the evils of corruption and its impact on society. These poetic lines inspire awareness, accountability, and a call for change in the fight against injustice.

Best Corruption Shayari on Social Injustice

जो वक़्त-ए-ख़त्ना मैं चीख़ा तो नाई ने कहा हँस कर
मुसलमानी में ताक़त ख़ून ही बहने से आती है
Akbar Allahabadi
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अब तो खु़द के ऊपर गै़रत सी होती है
इक टाइम था सचमुच तेरे क़ाबिल था मैं
Daqiiq Jabaali
मैं बहुत कम बोलता हूँ और ज़्यादा सोचता हूँ
इसको आदत कह लो मेरी चाहे ताक़त कह लो मेरी
Daqiiq Jabaali
अलग तुम बेवफ़ाओंं की वकालत है
हमारी फिर किधर कैसी अदालत है

अगर ये है समझदारी जो तुझ में है
तो मुझको गर्व है मुझ में जहालत है
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Harsh Raj
दहशत-गर्दी फैल रही है अब मज़हब के नारों से
लोगों को मारा जाता है गोली से हथियारों से

कौन है रहबर कौन है रहज़न सबको ख़बर है 'दानिश' अब
क़ातिल को ताक़त मिलती है सत्ता के गलियारों से
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Shayar Danish
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Heart Touching Corruption Shayari in Hindi

मुन्सिफ़ हो अगर तुम तो कब इंसाफ़ करोगे
मुजरिम हैं अगर हम तो सज़ा क्यूँ नहीं देते
Ahmad Faraz
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मंज़िलों के लिए रास्ता चाहिए
रास्ता हो तो फिर हौसला चाहिए

जंग इंसाफ़ की जीतने के लिए
सब्र का इक बड़ा क़ाफ़िला चाहिए
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Meem Alif Shaz
कौन उसके जुर्म की सच्ची गवाही देगा शाज़
पूरी की पूरी अदालत बिक चुकी है पहले ही
Meem Alif Shaz
ज़िक्र जब भी हो गुनाहों का 'मनोहर'
फ़ैसला तो फिर अदालत ही करेगी
Manohar Shimpi
पहली सफ़ में जो खड़े हैं क़त्ल का इंसाफ लेने
गर जो मुर्दा बोलता होता तो फिर सफ़ साफ होती
Aqib khan

Emotional Corruption Shayari on Society and Ethics

जलता नहीं हूँ आतिश-ए-रुख़सार देख कर
करता हूँ नाज़ ताक़त-ए-दीदार देख कर
Shaikh Sohail
ख़ुद ब ख़ुद बुझ जाएँगे ज़ुल्म-ओ-सितम के सब दिए
सब जलाएँ गर जो इंसाफ़- ओ- अदल का इक दिया
A R Sahil "Aleeg"
मेरे या रब मेरी अदना सी दुआ है तुझसे
मुझको हक़ कहने की हक़ सुनने की ताक़त देना
Shajar Abbas
क्यों छोड़कर गया तू मुझे ऐसे हाल में
क्या एक बार भी तुझे ग़ैरत नहीं हुई
Daqiiq Jabaali
क़ाएम रहे उसूल पे दोनों अख़ीर तक
मैं भी अना परस्त था ग़ैरत उसे भी थी
Shadab Shabbiri

Short Corruption Shayari for Instagram Captions

दिल से जो बात निकलती है असर रखती है
पर नहीं ताक़त-ए-परवाज़ मगर रखती है
Allama Iqbal
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अदालत में गवाही कौन देगा
कि सब ने मौत की आहट सुनी है
Meem Alif Shaz
एक ख़त्म नहीं होता कि रग-ए-जां दबाने को
कोई नया मस'अला तैयार रहता है

जाने तू कैसी अदालत का मुंसिफ़ है
तेरी निगाह में हर शख़्स गुनहगार रहता है
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Sushrut Tiwari
डरेंगे हम नहीं ताक़त से और तादाद से ज़ुल्मों के सौदागर
ख़ुदा लश्कर अबाबीलों का भेजेगा हिजाबों की हिफ़ाज़त में
A R Sahil "Aleeg"
अदालत में ग़लत साबित न हो बस
बुराई भी बुरी होती नहीं तब
Umesh Maurya

Poetic Corruption Shayari in Urdu

मैं मारा जाऊँगा पहले किसी फ़साने में
फिर इस के ब'अद हक़ीक़त में मारा जाऊँगा

मैं चुप रहा तो मुझे मार देगा मेरा ज़मीर
गवाही दी तो अदालत में मारा जाऊँगा
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Rana Saeed Doshi
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अलग तुम बेवफाओं की वकालत है
हमारी फिर किधर कैसी अदालत है
Harsh Raj
फ़रेबी नैन वाली ने मेरे दिल को चुराया है
मुझे इस पर शिकायत है अदालत को बिठाओ तुम
Shayar Sadiq hassan
जो जो आरोप हैं उन सब पे सफ़ाई देंगे
हम तो जनता की अदालत से रिहाई लेंगे
Aatish Indori
ज़ख्म से दिल भर गया है
शख़्स इक वो मर गया है

मत सुना कोई कहानी
मेरा जी अब भर गया है

अब अदालत कौन जाए
राजा से जज डर गया है

अब नदी बहती नहीं क्यूँ
पाप से जग भर गया है

तेरी चुप्पी खल गई है
इश्क़ से वो डर गया है
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Nitesh Vatts

Corruption Shayari on Accountability and Change

अब मेरी क़लम में ताक़त पुर-जहाँ आई हैं
औक़ात किसी ने फिर ख़ुद अपनी दिखाई हैं

इतराता हैं क्यूँ तू उस को अपने लगा के मुँह
भाई मिरे झूँठन तूने मेरी ही खाई हैं
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Deep kamal panecha
अपने लिए तो इश्क़ भी ग़ैरत की चीज़ थी
हम लोग वो थे जिनको पढ़ाया ग़लत गया
Aqib khan
मिरे हर क़दम पर मिरी जाँ के दुश्मन
मिरे हक़ में कोई अदालत नहीं है
Raushan miyaa'n
मरे हुए पौधों में भी जान फूँक दे इक बार
इतनी ताक़त होती है यादों की ताबिश में
Sandeep dabral 'sendy'
हमारी वफ़ा का वो इंसाफ़ होगा
तिरी आंख से जब ये काजल छटेंगे
Aarush Sarkaar

Thoughtful Corruption Shayari on Political Issues

निकलते ही ग़लत फ़हमी सभी हैरत में आएँगे
हो सूरज सामने जुगनू तभी ग़ैरत में आएँगे

~अंसार एटवी
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Ansar Etvi
लानत हो हुकूमत पे सदा हाकिम-ए-क़लमी
इंसाफ़ से महरूम हैं मज़लूम वतन के
Shajar Abbas
शिकस्त-ए-दिल है ग़म ऐसा कहीं लज़्ज़त नहीं आती
मिले कितने भी ताने फिर मगर ज़िल्लत नहीं आती

गुमाँ है हुस्न पे उसको चढ़ा हमपे ख़ुमार-ए-इश्क़
उसे उल्फ़त नहीं आती हमें ग़ैरत नहीं आती
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Rehaan
तसव्वुर को हक़ीक़त कर रहा हूँ
तुम्हें अपनी मुहब्बत कर रहा हूँ

तिरा दिल वो अदालत है कि जिसमें
वफ़ा की मैं वकालत कर रहा हूँ
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Kaviraj " Madhukar"
सपने गए सुकून भी उल्फ़त चली गई
मिलने की अपने आप से फ़ुर्सत चली गई

मेरी तो बोलने की ही आदत चली गई
तेरे ही साथ सारी शरारत चली गई

खुशियांँ थीं उससे घर में थीं आंँगन में रौनकें
बिटिया के साथ घर की भी बरकत चली गई

छूटा तुम्हारा साथ तो बाक़ी ही क्या बचा
दिल में जो पल रही थी वो हसरत चली गई

आते नहीं फ़क़ीर न साइल भी आजकल
माँ क्या गई कि घर की रिवायत चली गई

मेरे सुख़न पे तूने उठाईं जो उंँगलियांँ
मेरी तमाम उम्र की मेहनत चली गई

यूंँ भी कभी जहान में इफ़रात में न थी
थोड़ी बहुत थी वो भी सदाक़त चली गई

होती नहीं है शेर की आमद भी अब नज़र
तुम क्या गए कि लफ़्ज़ की ताक़त चली गई
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Nazar Dwivedi

Corruption Shayari on Truth and Integrity

अदालत भी हमारी है सियासत भी हमारी है
जहाँ तक झूठ दिखती वो रियासत भी हमारी है
Umesh Maurya
मुहब्बत की कोई रंगीन चाहत भी नहीं तुमसे
कोई ग़ैरत नहीं तुमसे कि हसरत भी नहीं तुमसे

मुझे यूँ छोड़ कर जाते हुए इतना कहा उसने
शिकायत भी नहीं तुमसे मोहब्बत भी नहीं तुमसे
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AYUSH SONI
ख़ुदा तेरे वजूद से इनकार नहीं है मुझको
मगर सवाल तो तेरे इंसाफ-परस्त का है
A R Sahil "Aleeg"
नौकर ही देखेगी वो शहजादा नइँ
दोस्त पढ़ाई कर ले प्यार का वादा नइँ

प्यार मुहब्बत में भी ताक़त होती है
हाँ लेकिन सरकारी जॉब से ज्यादा नइँ
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Vijay Potter Singhadiya
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रहम, इंसाफ़ से ख़ाली जब हो ये दिल
फिर वो कुछ और ही है पर इंसाँ नहीं है
A R Sahil "Aleeg"

Inspirational Corruption Shayari for Awareness

अदालत के सभी निर्णय सही होना ज़रूरी हैं
मुकर्रर हो सज़ा कोई गलत निर्णय सुनाने की
Umesh Maurya
औरत की ताक़त पर जानाँ शक नइ करते
पत्थर पिघला देती है सीने से लगाकर
Shayra kirti
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अदालत झूठ सुनती है मोहब्बत से
मगर सच के लिए ग़ुस्सा मुकर्रर है
Meem Alif Shaz
लगाई है सियासत ने वतन मे आग नफ़रत की
चला दे तू ख़ुदाया जो हवाएँ हैं मुहब्बत की

दिखाते हैं हुक़ूमत की हमें ताक़त यहाँ अपनी
दिखा वो तू ज़रा ताक़त ख़ुदा अपनी हुक़ूमत की
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Azhan 'Aajiz'
अदालत का ये चेहरा तो नहीं था
यहाँ पे ज़ुल्म गहरा तो नहीं था

सभी को थी मोहब्बत मज़हबों से
किसी मज़हब को ढाया तो नहीं था
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Meem Alif Shaz

Corruption Shayari on Fighting Injustice and Dishonesty

सारी दुनिया है आपकी हमदर्द
इश्क़ में देगा कौन अब इंसाफ़
A R Sahil "Aleeg"
कब अदालत किसे बरी कर दे
फ़ैसला अब अटल नहीं होता

शूल बोते हैं पाँव के नीचे
सच पे चलना सरल नहीं होता
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Tarique Jamal Ansari
ज़रूरत ही नहीं अब हम को मुंसिफ की
कि अब क़ातिल ही ख़ुद इंसाफ़ करता है
Meem Alif Shaz
उसकी सारी ज़ुल्मत को अब बातिल ही हम बोलेंगे
उसके सारे लँगूरों को बुज़दिल ही हम बोलेंगे

उस ज़ालिम की इस गंदी साज़िश से बिल्कुल मत डरना
क़ातिल को पूरी ताक़त से क़ातिल ही हम बोलेंगे
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Shayar Danish
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ग़ैरत मुझे ख़ुद पे की मैं मज़े में हूँ
रंज उसे इसका की मैं खुश ही नहीं
Aryan Goswami