रात दिन जब सफ़र में गुज़ारे हुए
तब नदी को मुकम्मल किनारे हुए
'इश्क़ है तो यही, बोलना लाज़मी
तुम हमारी हुईं, हम तुम्हारे हुए
ख़ुद गिरे यार, उसको ना गिरने दिया
जिस किसी के कभी हम सहारे हुए
इतने तो ख़ूबसूरत सितारे नहीं
जितने हैं, झुमके उसके उतारे हुए
क्या सिखाए तुम्हे, 'इश्क़ को जीतना
यार हम हैं, यही खेल हारे हुए
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