Nawaaz

Nawaaz

@nawaaz

Nawaaz shayari collection includes sher, ghazal and nazm available in Hindi and English. Dive in Nawaaz's shayari and don't forget to save your favorite ones.

Followers

19

Content

11

Likes

144

Shayari
Audios
  • Sher
  • Ghazal

Sher

हमें ये जिस तरह से ख़याल तेरा खेंच लेता है लगा ले शर्त, तुझ सेे ग्रैविटी ने हार जाना है — Nawaaz
हमारा मसअला है जो हमी ने हार जाना है हमारी खुद-कुशी में ज़िन्दगी ने हार जाना है — Nawaaz

Ghazal

हमारा मसअला है जो हमी ने हार जाना है हमारी ख़ुद-कुशी में ज़िन्दगी ने हार जाना है गुलाबों ने, सितारों ने, परी ने हार जाना है कि आगे आप के तो हर किसी ने हार जाना है हमें ये जिस तरह से ख़याल तेरा खेंच लेता है लगा ले शर्त तुझ सेे ग्रैविटी ने हार जाना है हमें बस आप के होंठों प रखने हैं हमारे लब हमें मालूम है फिर तिश्नगी ने हार जाना है ख़ुदा ने औरतों को दिल कशी ख़ुद बख्श रक्खी है बज़ाहिर बात है के आदमी ने हार जाना है नहीं है इस जहाँ में ख़ूब-सूरत कुछ तिरे जैसा तभी तुझ सेे तिरी तस्वीर ही ने हार जाना है मुहब्बत हो, लड़ाई हो सभी का फ़ैसला तय है किसी ने जीत जाना है, किसी ने हार जाना है — Nawaaz
आ गए हैं आप जब लेने नज़ारे इस चमन के तो फ़लक से आ गए हैं सब सितारे फूल बन के रोज़ हम नज़दीक आते जा रहे हैं उस बदन के चल रहा है जो सताइसवीं सतह पर बाँकपन के ये हमें वो जिस तरह से आ गया है दीद देने के हमें तो यूँँ लगा के आ गया है चाँद छन के इस सलीक़े से फ़लक पर अब्र बन कर छा गया है तू हमारी धूप जैसी ज़िन्दगी पर छाँव बन के ख़ूब-सूरत लग रहा है वो थकन से चूर होकर ख़ूब-सूरत हो गए हैं सब मु'आनी भी थकन के है मशक्क़त ज़िन्दगी की और शाइ'र से मुहब्बत मैं मुसलसल दाद देना चाहता हूँ इस जतन के आप के आगे भला इन ज़ेवरों की क्या मिसालें कंगनों ने हार मानी जब सुनहरे हाथ खनके — Nawaaz
हमें ये ग़म नहीं है के पयम्बर दुख नहीं समझे मगर ये डर सताता है कि तुम गर दुख नहीं समझे अगर तुम दुख समझ पाते हमें सीने लगते तुम भले कहते रहे हो तुम कभी पर दुख नहीं समझे तुम्हारे बा'द हम को बस तग़ाफ़ुल ही मिला है, बस! सितारे दुख नहीं समझे, समुंदर दुख नहीं समझे कभी भी जान कर उस ने हमारा ग़म नहीं भाँपा हमारा मसअला है के सितमगर दुख नहीं समझे कभी मिल कर ख़ुदा इतना बता मुझ को कि क्यूँ तू ने जहाने ख़ाक में हम को बना कर दुख नहीं समझे यही उम्मीद करता हूँ कि मेरे दुख को तुम समझे की तुम गर दुख नहीं समझे की तुम गर दुख नहीं समझे — Nawaaz