इस शहरे लाजवाब का नामचीन दुख है
वो इतना पाक ख़ूब-सूरत हसीन दुख है
मैं इंतिज़ार और वस्ल के दरम्यान हूँ
इन दोनो के बीच एक महीन दुख है
ये बात और है के तालियां बजी, लेकिन
मैं ने शे'र पढा था के नाज़िरीन दुख है
इक उम्मीदे नाज़ प उम्र गुज़ारे जाना
जॉन ये उदासी भी आलातरीन दुख है
— Nawaaz















