इस शहरे लाजवाब का नामचीन दु:ख है
वो इतना पाक खूबसूरत हसीन दु:ख है
मैं इंतिज़ार और वस्ल के दरम्यान हूँ
इन दोनो के बीच एक महीन दु:ख है
ये बात और है के तालियां बजी, लेकिन
मैंने शे'र पढा था के नाज़िरीन दु:ख है
इक उम्मीदे नाज़ प 'उम्र गुज़ारे जाना
जॉन ये उदासी भी आलातरीन दु:ख है
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