Nawaaz
Nawaaz
Ghazal

आ गए हैं आप जब लेने नज़ारे इस चमन के

तो फ़लक से आ गए हैं सब सितारे फूल बन के

रोज़ हम नज़दीक आते जा रहे हैं उस बदन के
चल रहा है जो सताइसवीं सतह पर बाँकपन के

ये हमें वो जिस तरह से आ गया है दीद देने
के हमें तो यूँ लगा के आ गया है चाँद छन के

इस सलीक़े से फ़लक पर अब्र बन कर छा गया है
तू हमारी धूप जैसी ज़िन्दगी पर छाँव बन के

ख़ूब-सूरत लग रहा है वो थकन से चूर होकर
ख़ूब-सूरत हो गए हैं सब मु'आनी भी थकन के

है मशक्क़त ज़िन्दगी की और शाइ'र से मुहब्बत
मैं मुसलसल दाद देना चाहता हूँ इस जतन के

आप के आगे भला इन ज़ेवरों की क्या मिसालें
कंगनों ने हार मानी जब सुनहरे हाथ खनके

— Nawaaz

More by Nawaaz

Other ghazal from the same pen

See all from Nawaaz →

Life Shayari

Shers of life.

All Life Shayari poetry →

Similar writers

Voices in the same orbit

Browse by mood

Poetry by feeling