aa ga.e hain aap jab lene nazare is chaman ke | आ गए हैं आप जब लेने नज़ारे इस चमन के

  - Nawaaz

आ गए हैं आप जब लेने नज़ारे इस चमन के
तो फ़लक से आ गए हैं सब सितारे फूल बन के

रोज़ हम नज़दीक आते जा रहे हैं उस बदन के
चल रहा है जो सताइसवीं सतह पर बाँकपन के

ये हमें वो जिस तरह से आ गया है दीद देने
के हमें तो यूँँ लगा के आ गया है चाँद छन के

इस सलीके से फ़लक पर अब्र बन कर छा गया है
तू हमारी धूप जैसी ज़िन्दगी पर छाँव बन के

खूबसूरत लग रहा है वो थकन से चूर होकर
खूबसूरत हो गए हैं सब मु'आनी भी थकन के

है मशक्क़त ज़िन्दगी की और शायर से मुहब्बत
मैं मुसलसल दाद देना चाहता हूँ इस जतन के

आपके आगे भला इन ज़ेवरों की क्या मिसालें
कंगनों ने हार मानी जब सुनहरे हाथ खनके

  - Nawaaz

Basant Shayari

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