रो रहा था गोद में अम्माँ की इक तिफ़्ल-ए-हसींइस तरह पलकों पे आँसू हो रहे थे बे-क़रारजैसे दीवाली की शब हल्की हवा के सामनेगाँव की नीची मुंडेरों पर चराग़ों की क़तार— Ehsan Danish