Shubham Seth

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@shubham-seth

Shubham Seth shayari collection includes sher, ghazal and nazm available in Hindi and English. Dive in Shubham Seth's shayari and don't forget to save your favorite ones.

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Sher

हँसती गाती अपनी आँख भिगो दोगे हाल हमारा जानोगे तो रो दोगे — Shubham Seth
आग उगलती रातों में इक शीतलता सी छायी थी गर्मी की छुट्टी में फिर वो मामा के घर आई थी — Shubham Seth
बता ज्योतिष तुझे कितने भरूँ पैसे बदलने को सभी ले कर मुझे वो दे, लकीरों को बदल मेरी — Shubham Seth
तुझे शीशा बनाया है ख़ुदा ने ध्यान रक्खा कर गले पत्थर के जो लगने लगेगा टूट जाएगा — Shubham Seth
मैं ने तेरा नाम लिखा है शजरों पर उन का हर इक फूल निहारा जाएगा — Shubham Seth
उन को दाना पानी मिलता, उन के भी बच्चे सो जाते कितना अच्छा होता जो सब अपने-अपने घर को जाते — Shubham Seth
ये लो ख़ंजर जितने भी हैं शिक़वे तुम बस ख़त्म करो इक ग़लती पर ता'ने देना बारी-बारी ठीक नहीं — Shubham Seth
सभी को लग रहा था ख़ुद-कुशी से मर गया था मैं मगर सच्चाई ये थी, ख़ुद ख़ुशी से मर गया था मैं — Shubham Seth
लुभाते थे उसे बस आज के शाइ'र सो मैं ने भी पढ़ीं तहजीब की ग़ज़लें करीं अफ़्कार की बातें — Shubham Seth
दिन गुजारूंँ आप के बिन ये तो था मुश्किल बहुत ख़ुद ख़ुशी से मर गया मैं, ख़ुद-कुशी आसान थी — Shubham Seth
किसी की ख़्वाहिशों को कब तलक तुम बाँध पाओगे बड़ा वो पेड़ होगा और गमला टूट जाएगा — Shubham Seth
पानी में मैं डूब रहा हूँ देख मुझे दरिया से ख़ुद दूर किनारा जाएगा — Shubham Seth
शिकायत के सिवा देखो उसे कुछ भी नहीं आता अगर हम एक-दो कर दें उसी पर रूठ जाता है — Shubham Seth
तितली वो ही फूल चुनेगी जिस पर उस का दिल आए इक लड़की के पीछे इतनी मारामारी ठीक नहीं — Shubham Seth
कहा उस बाप ने मुझ सेे न जाए ये कोरोना शहर से लौट आए देख लो बच्चे हमारे — Shubham Seth
अकेलापन हमें खा जाएगा मालूम तो था तुझे देखे बिना फिर भी मरेंगे कम अकेले — Shubham Seth

Ghazal

इन दौलत पैसे वालों से देखो यारी ठीक नहीं यारी फिर भी चल जाएगी रिश्तेदारी ठीक नहीं मत पहनाओ अच्छे कपड़े मत डालो आदत उस को मुफ़लिस के बच्चे को टॉफ़ी इतनी सारी ठीक नहीं तितली वो ही फूल चुनेगी जिस पर उस का दिल आए इक लड़की के पीछे इतनी मारामारी ठीक नहीं इस में ग़लती तेरी है जो तुझ को अक्ल अभी आई मैं तो कब से बोल रहा हूँ ये जब्बारी ठीक नहीं मैं ने माँ को कितना बोला मेरी चिंता छोड़ो तुम बीपी के बीमारों को ये सोच-विचारी ठीक नहीं ये लो ख़ंजर जितने भी हैं शिक़वे तुम बस ख़त्म करो इक ग़लती पर ता'ने देना बारी-बारी ठीक नहीं — Shubham Seth
कहे ये दिल सुब्ह पढ़ के वही अखबार की बातें कहाँ तक अब सुने ये रोज़ की बेकार की बातें बड़े दिन बा'द आया पर वही घर-बार की बातें चलो दो कश लगाएं भूल कर संसार की बातें शिकारी बन गया सरदार जब अपने ही जंगल का भला जंगल सुने क्यूँ ऐसे अब ग़द्दार की बातें बिलख कर उन दरख़्तों ने हमें ये बद्दुआएं दीं मरोगे और होंगीं साँस के व्यापार की बातें मिला बरसों पुराना यार थोड़ी हिचकिचाहट थी हमें सूझा नहीं कुछ और बस दो चार की बातें हमें अच्छे दिनों की आश थी आए नहीं वो दिन महज़ बातें रहीं आख़िर वही सरकार की बातें अरे छोड़ो हटाओ अब मुहब्बत कौन करता है बड़े हम ढीठ थे करते रहे सो प्यार की बातें लुभाते थे उसे बस आज के शाइ'र सो मैं ने भी पढ़ीं तहजीब की ग़ज़लें करीं अफ़्कार की बातें भुगतना ही पड़ा हर बार ही अंजाम ग़लती का नहीं मानी गई जब भी तजुर्बेकार की बातें समझ में ही नहीं आया मुझे वो आदमी अब तक कभी अश्जार की बातें कभी नज्जार की बातें — Shubham Seth