इन दौलत पैसे वालों से देखो यारी ठीक नहीं

यारी फिर भी चल जाएगी रिश्तेदारी ठीक नहीं

मत पहनाओ अच्छे कपड़े मत डालो आदत उस को
मुफ़लिस के बच्चे को टॉफ़ी इतनी सारी ठीक नहीं

तितली वो ही फूल चुनेगी जिस पर उस का दिल आए
इक लड़की के पीछे इतनी मारामारी ठीक नहीं

इस
में ग़लती तेरी है जो तुझ को अक्ल अभी आई

मैं तो कब से बोल रहा हूँ ये जब्बारी ठीक नहीं
मैं ने माँ को कितना बोला मेरी चिंता छोड़ो तुम

बीपी के बीमारों को ये सोच-विचारी ठीक नहीं
ये लो ख़ंजर जितने भी हैं शिक़वे तुम बस ख़त्म करो

इक ग़लती पर ता'ने देना बारी-बारी ठीक नहीं

— Shubham Seth

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