न जाने कौन सा डूबा है उसका भाग पानी में
बुझाये बुझ नहीं पाती लगी जो आग पानी में
बदन पर जिस तरफ़ तूने घुमाईं उंगलियां ज़ालिम
बहुत धोये मगर जाते नहीं वो दाग़ पानी में
नमक इतना भरा है आँख के इस हौज में अब तो
बड़ी कोशिश से भी बनता नहीं है झाग पानी में
समंदर में लहर उठतीं कभी ऊँची कभी नीची
वो जब भी छेड़ता है यार मेरा राग पानी में
चलो मैं प्यार करना छोड़ दूंगा उस समय तुझ सेे
उड़ेंगे जब मगर ऊपर रहेंगे काग पानी में
Our suggestion based on your choice
As you were reading Shayari by Shubham Seth
our suggestion based on Shubham Seth
As you were reading Love Shayari Shayari