अव्वल तो वो हुस्न सँवारा जाएगा

फिर तुझ को उस हुस्न से मारा जाएगा

मैं ने तेरा नाम लिखा है पेड़ों पर
उन का हर इक फूल निहारा जाएगा

पानी में मैं डूब रहा हूँ देख मुझे
दरिया से ख़ुद दूर किनारा जाएगा

इक दिन ख़ुद फिर मिट्टी में मिट्टी होकर
इस धरती का क़र्ज़ उतारा जाएगा

जितनी तुम आवाज़ दबाओगे मेरी
उतना ऊँचा मेरा नारा जाएगा

तेरे बिन तो इक पल भी आराम नहीं
कैसे तेरे बा'द गुज़ारा जाएगा

— Shubham Seth

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