तेरी गली को छोड़ के पागल नहीं गया रस्सी तो जल गई है मगर बल नहीं गयामजनूँ की तरह छोड़ा नहीं मैं ने शहर कोया'नी मैं हिज्र काटने जंगल नहीं गया— Ismail Raaz