paani aankh mein bharkar laaya ja saka hai | पानी आँख में भरकर लाया जा सकता है

  - Abbas Tabish

पानी आँख में भरकर लाया जा सकता है
अब भी जलता शहर बचाया जा सकता है

  - Abbas Tabish

Shehar Shayari

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    ऐसा बदला हूँ तिरे शहर का पानी पी कर
    झूट बोलूँ तो नदामत नहीं होती मुझ को
    Shahid Zaki
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    अनोखी वज़्अ है सारे ज़माने से निराले हैं
    ये आशिक़ कौन सी बस्ती के या-रब रहने वाले हैं
    Allama Iqbal
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    तमाम शहर को तारीकियों से शिकवा है
    मगर चराग़ की बैअत से ख़ौफ़ आता है
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    जिस शहर में भी रहना उकताए हुए रहना
    Muneer Niyazi
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    न जाने कैसी महक आ रही है बस्ती से
    वही जो दूध उबलने के बाद आती है
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    मिज़्गाँ तो खोल शहर को सैलाब ले गया
    Meer Taqi Meer
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    ये दिल मलूल भी कम है उदास भी कम है
    कई दिनों से कोई आस पास भी कम है

    हमें भी यूं ही गुजरना पसंद है और फिर
    तुम्हारा शहर मुसाफ़िर-शनास भी कम है
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    किस ने हमारे शहर पे मारी है रौशनी
    हर इक मकाँ के ज़ख़्म से जारी है रौशनी
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    Bashir Badr
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    कोई शहर था जिसकी एक गली
    मेरी हर आहट पहचानती थी

    मेरे नाम का इक दरवाज़ा था
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    Ali Zaryoun
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    खींच लाती है हमे तेरी मुहब्बत वरना
    आख़िरी बार कई बार मिले हैं तुझसे
    Abbas Tabish
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    कोई अंदर की घुटन का भी इलाज
    गालियाँ काग़ज़ पे लिख कर फेंक दे
    Abbas Tabish
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    टूटते इश्क़ में कुछ हाथ बँटाते जाते
    सारा मलबा मेरे ऊपर न गिराते जाते

    इतनी उजलत में भी क्या आँख से ओझल होना
    जा रहे थे तो मुझे तुम नज़र आते जाते

    कम से कम रखता पलटने की तवक़्क़ो तुम से
    हाथ में हाथ लिया था तो दबाते जाते

    किन अँधेरों में मुझे छोड़ दिया है तुमने
    इस से बेहतर था मुझे आग लगाते जाते

    मैं भी होता तेरे रस्ते के दरख़्तों में दरख़्त
    इस तरह देख तो लेता तुझे आते जाते
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    Abbas Tabish
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    मेरे आँसू मिरे अंदर ही गिरे
    रोने से जी और बोझल हो गया
    Abbas Tabish
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    न पूछ कितने है बेताब देखने के लिए
    हम एक साथ कईं ख़्वाब देखने के लिए

    मैं अपने आप से बाहर निकल के बैठ गया
    कि आज आयेंगे अहबाब देखने के लिए

    जमाने बाद बिल-आख़िर वो रात आ गयी है
    कि लोग निकले है महताब देखने के लिए

    सुनहरी लड़कियों इनको मिलो मिलो न मिलो
    गरीब होते है बस ख़्वाब देखने के लिए

    मुझे यक़ी है कि तुम आईना भी देखोगे
    मेरी शिकस्त के असबाब देखने के लिए
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    Abbas Tabish
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