akelapan hamein kha jayega maaloom to tha | अकेलापन हमें खा जायेगा मालूम तो था

  - Shubham Seth

अकेलापन हमें खा जायेगा मालूम तो था
तुझे देखे बिना फिर भी मरेंगे कम अकेले

  - Shubham Seth

Sad Shayari

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    Aakash Giri

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    अच्छा तुम भी उसके पीछे पागल हो
    इसका मतलब तुम भी पूरे पागल हो

    काजल बिंदी इन पर अब भी लिखते हो
    अब भी इनके पीछे इतने पागल हो

    खुद को पागल तो कोई भी कह लेगा
    साबित कैसे कर पाओगे पागल हो

    तुमने हक़ माँगा न ही कोई जंग लड़ी
    तुम ही बोलो कैसे मानें पागल हो

    मुझ जैसे पागल से प्यार हुआ तुमको
    फिर तो तुम भी अच्छे-खासे पागल हो

    तुमने भी उस पागल पर पत्थर फेंके
    तू भी काश किसी के पीछे पागल हो

    पागल की सब किस्में देख-परख लेना
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    Shubham Seth
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    मिरे सब यार पत्थर हैं
    बड़े दमदार पत्थर हैं

    लगा था फूल हैं सारे
    नहीं हैं यार, पत्थर हैं

    मुहब्बत पर लिखूँ कैसे
    मिरे अशआर पत्थर हैं

    तिरी ख़ातिर बहुत झेले
    बड़े बेकार पत्थर हैं

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    कहाँ तक आँसु बरसाऊं
    अभी दरकार पत्थर हैं
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    Shubham Seth
    नहीं नाराज़गी उसकी, परेशानी असल मेरी
    नहीं हो पा रही कबसे मुकम्मल इक ग़ज़ल मेरी

    हजारों आज बैठे हैं तुझे सर पे बिठाने को
    मगर दिल में बिठा के कर सकेंगे क्या नकल मेरी

    चलो अब तोड़ देते हैं वो वादे जीने-मरने के
    नहीं रहती तबीयत ठीक देखो आज कल मेरी

    बता ज्योतिष तुझे कितने भरूँ पैसे बदलने को
    सभी लेकर मुझे वो दे, लकीरों को बदल मेरी

    मिला था साथ मुझको जब मिरे उस्ताद गौहर का
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