Angdaai Shayari - Poetic Verses Reflecting Elegance and Romantic Gestures

Discover a captivating collection of Angdaai Shayari that beautifully captures the charm and elegance of stretching moments in love and life. These poetic lines express romantic feelings and subtle gestures, perfect for soulful expressions.

Best Angdaai Shayari on Romantic Moments

जाने कैसी कश्मकश है क्या करूँ
जी में आता है कि दुनिया फूँक दूँ
Ajeetendra Aazi Tamaam
हुआ हम को भला क्या ग़म चलो हम भी नहीं कहते
अरे तुम भी तो कोई बात सीधी-सी नहीं कहते

निगाहों को तिरी पढ़ना अजब सी कश्मकश है ये
न चुप रहते हैं दोनों और ये कुछ भी नहीं कहते
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anupam shah
मैं अरसे बाद इतनी कशमकश से फिर से गुज़रा हूँ
कि तेरी इंतज़ारी है औ' तन्हा भी बहुत ख़ुश हूँ
anupam shah
मैं तुम्हें याद करूँ या न करूँ सजनी जी
कश्मकश में ही मिरी रात गुज़र जाती है
Akash Rajpoot

Heart Touching Angdaai Shayari in Hindi

शब-ए-इंतिज़ार की कश्मकश में न पूछ कैसे सहर हुई
कभी इक चराग़ जला दिया कभी इक चराग़ बुझा दिया
Majrooh Sultanpuri
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खोने का तुझको डर निकले,
बेचैनी से हम मर निकले,

साँसों में तब साँसें आईं,
जब दिल के तुम अंदर निकले
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Divya 'Kumar Sahab'
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जाने कितनी कहानियाँ समेटे रहा होगा
वो जो शख़्स हाल-ए-दिल बायाँ करता भी नहीं

दर्द कितनी होगी, बेचैनी कितनी होगी
वो ज़ुबान जो किसी से कुछ कहता ही नहीं
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Ashish Anand
तन्हाई, ख़ामोशी, बेचैनी, सब कुछ तो है
तेरी मोहब्बत ने भी ख़ूब नवाज़ा है हम को
Meem Alif Shaz

Beautiful Angdaai Shayari on Love and Elegance

मेरी बेचैनी का आलम मेरी बेचैनी से पूछो
मेरे चहरे से पूछोगे कहेगा ठीक है सब कुछ
Aqib khan
कोई बेचैनी से चेहरा तेरा मुरझाया हुआ है
देख के हालत तेरी दिल मेरा घबराया हुआ है
Manohar Shimpi
इक बेचैनी सी है मन में क्या होगा ये रब जाने
यार मिरे कोई पूछो रब से वो तो है सब जाने
Kabir Altamash
जीतना वश में है नहीं अपने
सीखना यार अपने वश में है

कौन कब जीता और कब हारा
मन इसी एक कश्मकश में है
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Sahil Verma

Emotional Angdaai Shayari in Urdu

कोई दीवाना कहता है कोई पागल समझता है
मगर धरती की बेचैनी को बस बादल समझता है
Kumar Vishwas
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बड़ी बेचैनी से वो छत पे आती है
गली में यानी कोई अब भी रहता है
Mohd Arham
बर्फ़ीली यादों से सीने में बेचैनी है
उन के आते ही मौसम में गर्मी आएगी
Meem Alif Shaz
रात भर गिनते रहे तारे मगर फिर
चाँद हाथों से गया इस कश्मकश में
Shoonya Shrey

Short Angdaai Shayari for Instagram Captions

तेरी अंँगड़ाई के आलम का ख़याल आया जब
ज़ेहन-ए-वीरांँ में खनकने लगे कंगन कितने
Shashank Shekhar Pathak
महज़ जिद्द-ओ-जहद भी इक काम ही है
कश्मकश से फिर मिले अंजाम ही है
Manohar Shimpi
साँस मेरे सीने से इक इक उखड़ जाएगी तब भी
देखना चेहरे पे सोती एक बेचैनी मिलेगी
Mohit Subran
तैरने की कश्मकश में डूबते देखा है सबको
डूबने वाले को सचमुच तैरना आता है लेकिन
Aatish Alok

Angdaai Shayari on Gestures and Beauty

पलक का बाल गिरे कब मैं कब तुझे माँगूँ
मैं कशमकश में ये पलकें न नोच लूँ अपनी
Vishnu virat
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ज़रा सा कश्मकश में हूँ ज़मीं पर देखकर तुझको
फ़लक पर यार तुझको तो चमकना चाहिए था ना
Shoonya Shrey
रातों की बेचैनी हम से पूछो
पूरी फ़िक्र बिछाकर सो जाते हैं
Meem Alif Shaz
ख़ौफ़, ख़ामोशी, बेचैनी ने था जकड़ा
हाथ मेरा तेरे हाथों ने था पकड़ा

प्यार है तो फिर झगडा भी करना सीखो
इत्तना सा बस हम दोनों में था झगड़ा
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Udit Narayan Mishra

Poetic Angdaai Shayari for Lovers

भोले बन कर हाल न पूछ बहते हैं अश्क तो बहने दो
जिस से बढ़े बेचैनी दिल की ऐसी तसल्ली रहने दो
Arzoo Lakhnavi
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अंधों की बेचैनी को तुम क्या जानो दुनियावालों
तुमने तो दोनों आँखों से ख़ूब उजाले देखे हैं
DEVANSH TIWARI
ये कैसी कश्मकश है कैसे किसे बतायें
रोना भी आ रहा है रो भी न पा रहा हूँ
Atul K Rai

Thoughtful Angdaai Shayari on Subtle Romance

उस की बेचैनी बढ़ाना चाहती हूँ
सुनिए कह कर चुप लगाना चाहती हूँ
Pooja Bhatia
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मोहब्बत यार कैसी कश्मकश में फँस गई जिसमें
छुपाना भी ज़रूरी है जताना भी ज़रूरी है

अँधेरे में चलेंगे तो गिरेंगे लोग लड़-भिड़ कर
कहाँ क्या चीज़ है घर में बताना भी ज़रूरी है
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Atul K Rai
ख़ामोशी, बेचैनी, यादें तेरी, मेरा ख़ालीपन
कितना कुछ है कमरे में तेरे और मेरे सिवा
Prashant Shakun
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Angdaai Shayari on Morning and Emotions

अनोखी कश्मकश में हूँ, कि क्यों ये चश्म नम है
न जीने की ख़ुशी है याँ न मरने का ही ग़म है
Sandeep dabral 'sendy'
मैं अर्से बाद इतनी कश्मकश में फिर से गुज़रा हूँ
कि तेरी इन्तिज़ारी है औ तन्हा भी बहुत ख़ुश हूंँ
anupam shah
तेरी अंगड़ाई बालिग़ हो गई है
मेरी तन्हाई बालिग़ हो गई है
Saarthi Baidyanath

Angdaai Shayari for Expressing Deep Feelings

ख़ुशियाँ तो कश्मकश में हैं पीछे बहुत अभी
अब्र-ए-मुहाल है ग़मों का पस्त होना याँ
Achyutam Yadav 'Abtar'
"तुम्हारा सारथी" तो लिख चुका हूँ ख़त के आख़िर में
मगर शुरुआत में अब क्या लिखूँ इस कशमकश में हूँ
Saarthi Baidyanath
आपने हमसे दग़ाबाज़ी की है तो अब हम
कुछ भी हो जाए पर अब यार नहीं हो सकते

कशमकश ख़त्म हो जीने की 'मैं चाहता हूँ'
सब मेरे जैसे तलबगार नहीं हो सकते
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Naveen "Bashaarat"