
हुआ हम को भला क्या ग़म चलो हम भी नहीं कहते
अरे तुम भी तो कोई बात सीधी-सी नहीं कहते
निगाहों को तिरी पढ़ना अजब सी कश्मकश है ये
न चुप रहते हैं दोनों और ये कुछ भी नहीं कहते
— anupam shah
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