DEVANSH TIWARI

DEVANSH TIWARI

@Devanshtiwari

DEVANSH TIWARI shayari collection includes sher, ghazal and nazm available in Hindi and English. Dive in DEVANSH TIWARI's shayari and don't forget to save your favorite ones.

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Sher

किसी से कह नहीं सकता हूँ जो मैं वही तो शा'इरी में कहता हूँ — DEVANSH TIWARI
दग़ा का सोचते ही जाँ मुझ पर मेरी तस्वीर हँसने वाली थी — DEVANSH TIWARI
रफ़्ता-रफ़्ता जाऊँगा मैं ज़ीस्त से तेरी जैसे मेरी दादी की बीनाई गई थी — DEVANSH TIWARI
करती रही है ज़िंदगी दिल की ज़मीं उदास चेहरा कहीं उदास है आँखें कहीं उदास — DEVANSH TIWARI
भूल-भुलैया में भी हम को इक-इक रस्ता याद रहा उन आँखों में जबसे देखा अपना ठिकाना भूल गए — DEVANSH TIWARI
आज उस ने जब पुकारा नाम ले कर के मुझे एक पल को नाम मेरा और प्यारा हो गया — DEVANSH TIWARI
शे'र पढ़ते हुए देखता हूँ कौन किस की तरफ़ देखता है — DEVANSH TIWARI
वो मुझे पूछते हैं गाँव में क्या रक्खा है मैं उन्हें कहता हूँ सब मेरे बड़े रहते हैं — DEVANSH TIWARI
मैं तुम्हारे हुस्न से वाक़िफ़ नहीं हूँ यूँँ करो तुम आज अपना दिल दिखाओ — DEVANSH TIWARI
एक परिंदे ने जबसे दो प्यारी बातें बोली हैं दिल में कितने दीप जले हैं आँखों में रंगोली है — DEVANSH TIWARI
किसी जगह पर कहीं जहाँ में किसी दिवस मैं तुम्हें दिखूँ तो सुनो न जानाँ पलट न जाना क़रीब आना गले लगाना — DEVANSH TIWARI

Ghazal

रास्ता हो या कोई दीवार साईं दोस्त हों तो हो ही जाते पार साईं ज़िंदगी से इस लिए ही लड़ रहा हूँ ज़िंदगी से करता हूँ मैं प्यार साईं आदमी तो आदमी है इश्क़ खो कर राम जी भी हो गए बेज़ार साईं बचपने में ख़्वाब होते थे बड़े सब अब हमारा ख़्वाब है इतवार साईं बीच में घर-बार है उस पार है वो भेज दे महबूब को इस पार साईं अब नहीं दिखते शजर उन खिड़कियों से खुल गया है अब वहाँ बाज़ार साईं रात दिन की ये कुढ़न उफ़ हाए रब्बा अब नहीं जँचता मुझे संसार साईं इश्क़ का मतलब फ़क़त अब जिस्म से है घट रहा है इश्क़ का मेआ'र साईं चाहता 'देवांश' भी है ख़ूब हँसना कर रहा है दिल मगर इनकार साईं — DEVANSH TIWARI

Nazm