मेयार-ए-ज़र्फ़ तो पहचान हमारादुश्मन भी लगता है मेहमान हमाराहम ग़ज़लें कहने वाले लड़के हैंहर नुक़्ते पर रहता है ध्यान हमारा— DEVANSH TIWARI