ये सड़कें बन गईं हुजरा हमारासुकूँ से पल नहीं गुज़रा हमारावो दफ़्तर एक कोठे की तरह हैये पेशा हो गया मुजरा हमाराकोई शातिर उड़ा कर ले गया जाँलटकता रह गया पिंजरा हमारामिलाना है तो बस नज़रें मिलाओसनम देखो नहीं शजरा हमारासुख़न-वर बस यही अब चाहता हैकहीं तस्लीम हो गजरा हमारा— DEVANSH TIWARI