कभी तो निकलो ग़ज़ल से बाहर नहीं सताओ क़दम बढ़ाओ
तुम्हारी जानिब ही आ रहे हैं नज़र उठाओ कदम बढ़ाओ
ये खिलखिलाती हसीन दुनिया ये बात करते हसीं सितारे
ये कह रहे हैं उठो मुसाफ़िर फ़लक झुकाओ क़दम बढ़ाओ
नहीं है तुमको गर उन सेे उलफ़त उन्हें भी कोई गिला नहीं है
शजर पे बैठे हुए हैं पंछी नहीं उड़ाओ कदम बढ़ाओ
है चाँद रौशन खुली हैं जुल्फें वो सीढ़ियों से उतर रही हैं
उतर न जाएँ वो उस सेे पहले नयन बिछाओ कदम बढ़ाओ
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