फूल की ख़ुशबू बदन चुराए बैठे हैंलोग हमारी रोटी खाए बैठे हैंकौन कहेगा कौन सुनेगा अब मेरीमसनद पर सब बिके बिकाए बैठे हैं— DEVANSH TIWARI