raasta ho ya koii deewaar saai | रास्ता हो या कोई दीवार साईं

  - DEVANSH TIWARI

रास्ता हो या कोई दीवार साईं
दोस्त हों तो हो ही जाते पार साईं

ज़िंदगी से इसलिए ही लड़ रहा हूँ
ज़िंदगी से करता हूँ मैं प्यार साईं

आदमी तो आदमी है 'इश्क़ खोकर
राम जी भी हो गए बेज़ार साईं

बचपने में ख़्वाब होते थे बड़े सब
अब हमारा ख़्वाब है इतवार साईं

बीच में घर-बार है उस पार है वो
भेज दे महबूब को इस पार साईं

अब नहीं दिखते शजर उन खिड़कियों से
खुल गया है अब वहाँ बाज़ार साईं

रात दिन की ये कुढ़न उफ़ हाए रब्बा
अब नहीं जँचता मुझे संसार साईं
'इश्क़ का मतलब फ़क़त अब जिस्म से है
घट रहा है 'इश्क़ का मेयार साईं

चाहता 'देवांश' भी है ख़ूब हँसना
कर रहा है दिल मगर इनकार साईं

  - DEVANSH TIWARI

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