
आँखों से है समझ न आना
फिर होंठों से क्या समझाना
सुख-दुख तो हैं सखा तुम्हारे
सो इनसे अब क्या घबराना
हारा-जीता क्षणिक है प्यारे
गिरना उठना क्या शर्माना
— DEVANSH TIWARI
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