कभी तो निकलो ग़ज़ल से बाहर नहीं सताओ क़दम बढ़ाओ
तुम्हारी जानिब ही आ रहे हैं नज़र उठाओ कदम बढ़ाओ
ये खिलखिलाती हसीन दुनिया ये बात करते हसीं सितारे
ये कह रहे हैं उठो मुसाफ़िर फ़लक झुकाओ क़दम बढ़ाओ
नहीं है तुम को गर उन से उलफ़त उन्हें भी कोई गिला नहीं है
शजर पे बैठे हुए हैं पंछी नहीं उड़ाओ कदम बढ़ाओ
है चाँद रौशन खुली हैं ज़ुल्फ़ें वो सीढ़ियों से उतर रही हैं
उतर न जाएँ वो उस से पहले नयन बिछाओ कदम बढ़ाओ
— DEVANSH TIWARI















