apni duniya bhi chal pade shaayad | अपनी दुनिया भी चल पड़े शायद

  - Madan Mohan Danish

अपनी दुनिया भी चल पड़े शायद
इक रुका फ़ैसला किया जाए

  - Madan Mohan Danish

Duniya Shayari

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    परतव से जिस के आलम-ए-इम्काँ बहार है
    वो नौ-बहार-ए-नाज़ अभी रहगुज़र में है
    Ali Sardar Jafri
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    लगा जब कि दुनिया की पहली ज़रूरत मोहब्बत है तब उसने माना
    यक़ीं हो गया जब मोहब्बत ज़रूरत है तब उसने माना

    वगरना तो ये लोग उसे ख़ुदकुशी के लिए कह चुके थे
    उसे आइने ने बताया कि वो ख़ूबसूरत है तब उसने माना
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    Vikram Gaur Vairagi
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    सिर्फ़ ज़िंदा रहने को ज़िंदगी नहीं कहते
    कुछ ग़म-ए-मोहब्बत हो कुछ ग़म-ए-जहाँ यारो
    Himayat Ali Shayar
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    ATUL SINGH
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    एक तरफ़ है पूरी दुनिया एक तरफ़ है मेरा घर
    लेकिन तुमको बतला दूँ मैं दुनिया से है अच्छा घर

    सब कमरों की दीवारों पर तस्वीरें हैं बस तेरी
    मुझसे ज़ियादा तो लगता है जानेमन ये तेरा घर
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    Tanoj Dadhich
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    जहाँ जो था वहीं रहना था उस को
    मगर ये लोग हिजरत कर रहे हैं
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    सगी बहनों का जो रिश्ता रिश्ता है उर्दू और हिन्दी में
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    Munawwar Rana
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    मैं दिल को उस मक़ाम पे लाता चला गया
    Sahir Ludhianvi
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    दुनिया के ताने सह लेता हूँ
    इक अच्छा बेटा कहलाना है
    Neeraj Neer
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    हम अपने दुख को गाने लग गए हैं
    मगर इस में ज़माने लग गए हैं

    किसी की तर्बियत का है करिश्मा
    ये आँसू मुस्कुराने लग गए हैं

    कहानी रुख़ बदलना चाहती है
    नए किरदार आने लग गए हैं

    ये हासिल है मिरी ख़ामोशियों का
    कि पत्थर आज़माने लग गए हैं

    ये मुमकिन है किसी दिन तुम भी आओ
    परिंदे आने जाने लग गए हैं

    जिन्हें हम मंज़िलों तक ले के आए
    वही रस्ता बताने लग गए हैं

    शराफ़त रंग दिखलाती है 'दानिश'
    कई दुश्मन ठिकाने लग गए हैं
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    तुम अपने आप पर एहसान क्यूँ नहीं करते
    किया है इश्क़ तो एलान क्यूँ नहीं करते

    सजाए फिरते हो महफ़िल न जाने किस किस की
    कभी परिंदों को मेहमान क्यूँ नहीं करते

    वो देखते ही नहीं जो है मंज़रों से अलग
    कभी निगाह को हैरान क्यूँ नहीं करते

    पुरानी सम्तों में चलने की सब को आदत है
    नई दिशाओं का वो ध्यान क्यूँ नहीं करते

    बस इक चराग़ के बुझने से बुझ गए 'दानिश'
    तुम आंधियों को परेशान क्यूँ नहीं करते
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    Madan Mohan Danish
    गुज़रता ही नहीं वो एक लम्हा
    इधर मैं हूँ कि बीता जा रहा हूँ
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    'दानिश' यूँ तस्लीम नहीं करती दुनिया
    अपने आपको साबित करना पड़ता है
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    बहुत दिनों तक दरिया भी हैरान रहा
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