ha | हमें ये ग़म नहीं है के पयम्बर दु:ख नहीं समझे

  - Nawaaz

हमें ये ग़म नहीं है के पयम्बर दु:ख नहीं समझे
मगर ये डर सताता है कि तुम गर दुःख नहीं समझे

अगर तुम दुःख समझ पाते हमें सीने लगते तुम
भले कहते रहे हो तुम कभी पर दुःख नहीं समझे

तुम्हारे बाद हमको बस तग़ाफ़ुल ही मिला है, बस!
सितारे दु:ख नहीं समझे, समुंदर दुःख नहीं समझे

कभी भी जान कर उसने हमारा ग़म नहीं भाँपा
हमारा मस'अला है के सितमगर दु:ख नहीं समझे

कभी मिलकर ख़ुदा इतना बता मुझको कि क्यूँ तूने
जहाने ख़ाक में हमको बनाकर दुःख नहीं समझे

यही उम्मीद करता हूँ कि मेरे दुःख को तुम समझे
की तुम गर दुःख नहीं समझे की तुम गर दुःख नहीं समझे

  - Nawaaz

Sad Shayari

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