Nawaaz
Nawaaz
Ghazal

हमें ये ग़म नहीं है के पयम्बर दुख नहीं समझे

मगर ये डर सताता है कि तुम गर दुख नहीं समझे

अगर तुम दुख समझ पाते हमें सीने लगते तुम
भले कहते रहे हो तुम कभी पर दुख नहीं समझे

तुम्हारे बा'द हम को बस तग़ाफ़ुल ही मिला है, बस!
सितारे दुख नहीं समझे, समुंदर दुख नहीं समझे

कभी भी जान कर उस ने हमारा ग़म नहीं भाँपा
हमारा मसअला है के सितमगर दुख नहीं समझे

कभी मिल कर ख़ुदा इतना बता मुझ को कि क्यूँ तू ने
जहाने ख़ाक में हम को बना कर दुख नहीं समझे

यही उम्मीद करता हूँ कि मेरे दुख को तुम समझे
की तुम गर दुख नहीं समझे की तुम गर दुख नहीं समझे

— Nawaaz

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