रोज़ रोने के बहाने ढूँढ़ते हैबेबसी से अपने रिश्ते ख़ून के हैदेख लेंगे फिर ग़लत क्या है सही क्याआ अभी इक दूसरे को चूमते है— Aman Mishra 'Anant'